लखनऊ। उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने और प्रति हेक्टेयर गन्ना उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित राज्य गन्ना प्रतियोगिता वर्ष 2025-26 के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं। प्रतियोगिता में हरदोई जिले के किसान अमर सिंह ने शीघ्र पौधा संवर्ग में 2430 क्विंटल प्रति हेक्टेयर गन्ना उत्पादन हासिल कर प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।
गन्ना विकास विभाग, उत्तर प्रदेश की ओर से जारी परिणाम के अनुसार राज्य गन्ना प्रतियोगिता के लिए प्रदेशभर से कुल 1078 आवेदन प्राप्त हुए थे। विभाग द्वारा नामित कटाई अधिकारियों से प्राप्त परिणामों के आधार पर किसानों को प्रदेश स्तर पर विजेता घोषित किया गया।
प्रतियोगिता में किसानों ने उन्नत बीज, वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों और आधुनिक तकनीकों का प्रयोग कर बेहतर गन्ना उत्पादन का प्रदर्शन किया। विभाग के अनुसार ड्रिप सिंचाई जैसी आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से भी किसानों को उत्पादन बढ़ाने में मदद मिली।
शीघ्र पौधा संवर्ग में अमर सिंह प्रथम
शीघ्र पौधा संवर्ग में हरदोई जिले के ग्राम महसूलापुर, जोन रूपापुर निवासी अमर सिंह पुत्र जयपाल सिंह ने 2430.00 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन के साथ प्रथम स्थान हासिल किया। पीलीभीत जिले के सुखदीप सिंह ने 2222.50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन के साथ दूसरा और शाहजहांपुर जिले के कौशल कुमार ने 2167.50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन के साथ तीसरा स्थान प्राप्त किया।
पौधा संवर्ग में शामली के देवेंद्र अव्वल
पौधा संवर्ग में शामली जिले के किसान देवेंद्र ने 1998.50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन के साथ प्रथम स्थान हासिल किया। सहारनपुर के सुधीर सिंह 1936.00 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन के साथ दूसरे और बागपत के अनुज पंवार 1935.00 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
सामान्य पौधा संवर्ग में शाहजहांपुर के कौशल कुमार प्रथम
सामान्य पौधा संवर्ग में शाहजहांपुर जिले के कौशल कुमार ने 1725.50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन के साथ पहला स्थान प्राप्त किया। बुलंदशहर के सुधीर सिंह 1695.00 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन के साथ दूसरे और बुलंदशहर के जितेंद्र कुमार 1446.50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
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ड्रिप सिंचाई में बिजनौर के अक्षांश सिंह ने मारी बाजी
ड्रिप विधि से सिंचाई वाले पौधा संवर्ग में बिजनौर के अक्षांश सिंह ने 2068.50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन के साथ प्रथम स्थान प्राप्त किया। बुलंदशहर के महावीर 1832.00 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के साथ दूसरे और बुलंदशहर के रतनपाल सिंह 1821.00 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
ड्रिप विधि से सिंचाई पेड़ी संवर्ग में शामली के इंद्रपाल सिंह ने 1865.00 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन के साथ प्रथम स्थान हासिल किया। बिजनौर के समरजीत सिंह दूसरे और मुजफ्फरनगर की राकेशवती तीसरे स्थान पर रहीं।
युवा गन्ना किसान भी प्रतियोगिता में आगे
युवा गन्ना किसान पौधा संवर्ग में मुजफ्फरनगर के नितिन चौधरी ने 1690.50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन के साथ प्रथम स्थान प्राप्त किया। बिजनौर के प्रेम विशेष सिंह दूसरे और मुजफ्फरनगर के निकित कुमार तीसरे स्थान पर रहे।
युवा गन्ना किसान पेड़ी संवर्ग में शामली के उज्जवल देशवाल ने 1507.00 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन के साथ पहला स्थान हासिल किया। शामली के अमित कुमार दूसरे और शामली के जितेंद्र तीसरे स्थान पर रहे।
विजेताओं को मिलेगी पुरस्कार राशि
राज्य गन्ना प्रतियोगिता के प्रथम पुरस्कार विजेताओं को 51 हजार रुपये, द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले किसानों को 31 हजार रुपये और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले किसानों को 21 हजार रुपये की पुरस्कार राशि दी जाएगी। इसके साथ विजेताओं को स्मृति चिह्न और प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किए जाएंगे।
विभाग की ओर से पूर्वी उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों की भागीदारी बढ़ाने और इस क्षेत्र में गन्ने की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए चार किसानों को 5-5 हजार रुपये के प्रोत्साहन पुरस्कार भी दिए जाएंगे।
प्रदेश में बढ़ रही गन्ने की उत्पादकता
गन्ना विभाग के अनुसार उत्तर प्रदेश में गन्ने की उत्पादकता में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। वर्ष 2025-26 में प्रदेश की औसत गन्ना उत्पादकता 825.60 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रही। राज्य गन्ना प्रतियोगिता में हरदोई के अमर सिंह द्वारा 2430 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन हासिल करना प्रदेश के किसानों के लिए एक उल्लेखनीय उपलब्धि मानी जा रही है।
गन्ना प्रतियोगिता का उद्देश्य प्रदेश के चीनी मिल क्षेत्रों में किसानों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करना और प्रति हेक्टेयर गन्ना उत्पादन बढ़ाना है। विभाग का मानना है कि प्रतियोगिता के विजेता किसानों से प्रेरणा लेकर अन्य किसान भी उन्नत प्रजातियों, वैज्ञानिक खेती और आधुनिक सिंचाई तकनीकों को अपनाकर गन्ने की उत्पादकता बढ़ा सकेंगे।
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