रिपोर्ट:- शरद मिश्रा
लखीमपुर खीरी: बिजुआ ब्लॉक की ग्राम पंचायत बिजुआ स्थित सरकारी गौशाला में अव्यवस्थाओं और गोवंशों की मौत का मामला गंभीर होता जा रहा है। गौशाला में रविवार को दो गोवंश मृत पाए गए। इनमें एक मादा गाय भी शामिल थी, जबकि बताया जा रहा है कि गौशाला नर गोवंशों के लिए आरक्षित है। लगातार हो रही मौतों और पशुओं के रखरखाव को लेकर जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मामले की पड़ताल के दौरान गौशाला में तैनात केयरटेकर ने मौतों को लेकर ऐसा दावा किया, जिसने पूरे मामले को और रहस्यमय बना दिया। केयरटेकर का कहना है कि पास स्थित कब्रिस्तान के ‘शैतान’ हरहा यानी सांड पर आ जाते हैं और इसके बाद गोवंशों की मौत होने लगती है। उसने कथित तौर पर कहा, “हरहा का उठाईक फेंक दिया, हमको भी उठाकर फेंक दिया।” केयरटेकर के इस दावे ने गौशाला की वास्तविक व्यवस्थाओं और जिम्मेदारों की निगरानी पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
50 की क्षमता, 139 गोवंश
गौशाला में क्षमता से कई गुना अधिक गोवंश रखे जाने की बात सामने आई है। जहां करीब 50 गोवंश रखने की क्षमता बताई जा रही है, वहीं यहां लगभग 139 मवेशियों के होने की जानकारी है। ऐसे में सवाल उठता है कि सीमित क्षमता वाली गौशाला में इतने अधिक पशुओं के लिए चारा, पानी, साफ-सफाई और पर्याप्त स्थान की व्यवस्था कैसे की जा रही है।
खबर से संबंधित वीडियो देखें
गौशाला में दो गोवंशों के मृत मिलने के बाद उनके स्वास्थ्य, भोजन और उपचार व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सबसे गंभीर सवाल यह है कि यदि लगातार गोवंश बीमार पड़ रहे हैं या उनकी मौत हो रही है तो जिम्मेदार विभाग की ओर से इसकी नियमित निगरानी और पशु चिकित्सकीय जांच क्यों नहीं कराई जा रही?
गौशाला में मादा गोवंश के पाए जाने की बात भी व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। यदि स्थल केवल नर गोवंशों के लिए निर्धारित है तो मादा गाय यहां कैसे पहुंची, इसकी जिम्मेदारी किसकी है? वहीं, मौतों की वैज्ञानिक और चिकित्सकीय जांच के बजाय अंधविश्वास से जुड़े दावे सामने आने से प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीरता पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस पूरे मामले की जांच कराकर गोवंशों की मौत की वास्तविक वजह सामने लाता है या फिर जिम्मेदारियों के बीच यह मामला भी दबकर रह जाएगा।
लखीमपुर खीरी:- महिला सिपाहियों पर कमेंट करना पड़ा भारी, पुलिस ने मनचलों की मोहल्ले में कराई परेड।


















