रिपोर्ट:- शरद मिश्रा (प्रतिभा टाइम्स)
सीतापुर। उत्तर प्रदेश के सीतापुर जनपद के जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर (IAS) अपनी कार्यशैली, अनुशासन और जनहित को प्राथमिकता देने वाले प्रशासनिक दृष्टिकोण के कारण लगातार चर्चा में हैं। वर्ष 2015 बैच के आईएएस अधिकारी डॉ. राजा गणपति आर प्रशासनिक सेवा में आने से पहले मेडिकल क्षेत्र से जुड़े रहे। उन्होंने चेन्नई के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की और इसके बाद सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल कर भारतीय प्रशासनिक सेवा का हिस्सा बने।
मेडिकल से प्रशासन तक का सफर
1 अक्टूबर 1984 को चेन्नई (तमिलनाडु) में जन्मे डॉ. राजा गणपति आर ने डॉक्टर बनने के बाद समाज की व्यापक सेवा का लक्ष्य तय किया। इसी सोच के साथ उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू की और पहले ही प्रयास में सफलता प्राप्त कर वर्ष 2015 बैच के आईएएस अधिकारी बने। प्रशिक्षण के दौरान उनकी प्रशासनिक क्षमता की सराहना हुई और उत्तर प्रदेश कैडर में उन्हें विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं।

करछना से मिली अलग पहचान
प्रशिक्षु एसडीएम के रूप में प्रयागराज (तत्कालीन इलाहाबाद) की करछना तहसील में उनका कार्यकाल भले ही छोटा रहा, लेकिन पारदर्शी प्रशासन, समयबद्ध कार्यशैली और आम लोगों की समस्याओं के त्वरित समाधान ने उन्हें जनता के बीच लोकप्रिय बना दिया। स्थानांतरण के समय स्थानीय लोगों का विरोध प्रदर्शन इस बात का संकेत था कि उन्होंने कम समय में लोगों का विश्वास अर्जित किया था।
भ्रष्टाचार के प्रति सख्त रुख
डॉ. राजा गणपति आर की पहचान ऐसे अधिकारी के रूप में रही है जो सरकारी कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही पर विशेष जोर देते हैं। सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता बनाए रखने के लिए उन्होंने अपने पूर्व कार्यकाल में नवाचार भी किए, जिनकी व्यापक चर्चा हुई। प्रशासनिक बैठकों में समयबद्ध लक्ष्य, जिम्मेदारी तय करना और नियमित समीक्षा उनकी कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

सीतापुर में विकास और जनहित पर विशेष फोकस
सीतापुर के जिलाधिकारी के रूप में डॉ. राजा गणपति आर लगातार विकास कार्यों की समीक्षा कर रहे हैं। सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, राजस्व, कानून-व्यवस्था और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर वे नियमित बैठकें करते हैं। तहसील दिवस, समाधान दिवस और जनसुनवाई के माध्यम से लोगों की शिकायतों का त्वरित निस्तारण कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
जिले में मानसून, बाढ़ की स्थिति, ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याएं, विद्यालयों की व्यवस्थाएं, स्वास्थ्य सेवाएं और राजस्व संबंधी मामलों की लगातार निगरानी की जा रही है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जनता से जुड़े मामलों में अनावश्यक देरी न हो और प्रत्येक शिकायत का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए।
जनता के बीच बढ़ा भरोसा
सीतापुर में प्रशासनिक सक्रियता और नियमित निरीक्षणों के कारण आम नागरिकों में यह संदेश गया है कि जिला प्रशासन समस्याओं के समाधान के लिए गंभीर है। विभिन्न विभागों की जवाबदेही तय करने और फील्ड विजिट के माध्यम से कार्यों की वास्तविक स्थिति पर नजर रखने की उनकी कार्यशैली की स्थानीय स्तर पर सराहना की जा रही है। कई सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने भी जनहित के मुद्दों पर प्रशासन की सक्रियता की प्रशंसा की है।

पत्नी भी हैं आईएएस अधिकारी
डॉ. राजा गणपति आर की पत्नी जे. रीभा (IAS) भी उत्तर प्रदेश कैडर की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं और वर्तमान में बांदा की जिलाधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। प्रशिक्षण के दौरान दोनों की मुलाकात हुई थी और बाद में दोनों ने विवाह किया। जे. रीभा इससे पहले अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में निदेशक सहित कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभा चुकी हैं।
कई जिलों में छोड़ चुके हैं प्रभाव
डॉ. राजा गणपति आर प्रयागराज, इटावा, सिद्धार्थनगर सहित विभिन्न जनपदों में अपनी कार्यकुशलता का परिचय दे चुके हैं। सख्त प्रशासन, ईमानदार छवि और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की वजह से उन्हें उत्तर प्रदेश के सक्रिय और प्रभावी आईएएस अधिकारियों में गिना जाता है। सीतापुर में भी उनसे विकास कार्यों की गति तेज होने और प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत बनाने की उम्मीद जताई जा रही है।











