रिपोर्ट:- दीप शंकर मिश्र”दीप” | प्रतिभा टाइम्स
विज्ञान से पुलिस सेवा तक का सफर
प्रयागराज के मूल निवासी राजेश कुमार पाण्डेय ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से वर्ष 1982 में वनस्पति विज्ञान में एमएससी की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद यूजीसी-नेट परीक्षा उत्तीर्ण कर भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), पूसा में शोध कार्य किया।
हालांकि उनका शुरुआती रुझान वैज्ञानिक अनुसंधान की ओर था, लेकिन वर्ष 1986 में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने पुलिस सेवा को अपना कार्यक्षेत्र बनाया और डिप्टी एसपी के रूप में नियुक्त हुए।
कई जिलों में निभाई अहम जिम्मेदारी
अपने लंबे पुलिस करियर के दौरान उन्होंने सोनभद्र, जौनपुर, आजमगढ़ और लखनऊ में क्षेत्राधिकारी (सीओ) के रूप में कार्य किया। बाद में एसपी सिटी लखनऊ, गाजियाबाद, मेरठ तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बाराबंकी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी तैनात रहे।
वर्ष 2005 बैच में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में प्रोन्नत होने के बाद उन्होंने रायबरेली और गोंडा के पुलिस अधीक्षक, जबकि सहारनपुर, लखनऊ, अलीगढ़ और मेरठ में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) के रूप में कानून व्यवस्था की कमान संभाली।
सेवा के अंतिम वर्षों में उन्होंने पुलिस उपमहानिरीक्षक (सुरक्षा) और बाद में बरेली रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) के रूप में कार्य किया।
STF और ATS में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
राजेश कुमार पाण्डेय उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के शुरुआती सदस्यों में शामिल रहे। उन्होंने लंबे समय तक एसटीएफ और आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) में कार्य करते हुए कई संवेदनशील मामलों में जिम्मेदारी निभाई।
पुलिस अधिकारियों के बीच उन्हें आधुनिक सर्विलांस प्रणाली को मजबूत करने वाले अधिकारियों में भी गिना जाता है। माना जाता है कि तकनीक आधारित अपराध जांच प्रणाली को विकसित करने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
आतंकी मामलों की जांच का अनुभव
अपने सेवा काल में उन्होंने कई चर्चित आतंकी मामलों की जांच और अभियानों में भूमिका निभाई। इनमें अयोध्या हमला, वाराणसी में हुए आतंकी विस्फोट और उत्तर प्रदेश की जिला अदालतों में हुए बम धमाकों से जुड़े मामले शामिल रहे।
वर्ष 2010 में उन्होंने यूनाइटेड किंगडम के रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (RIPA) में प्रशिक्षण भी प्राप्त किया, जहां आधुनिक पुलिसिंग और प्रशासनिक प्रबंधन से जुड़े विषयों का अध्ययन किया।
साहसिक अभियानों को लेकर भी रहे चर्चा में
पुलिस महकमे में लंबे समय तक सक्रिय रहने के दौरान राजेश कुमार पाण्डेय कई बड़े अभियानों का हिस्सा रहे। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध विवरणों के अनुसार, उत्तर प्रदेश एसटीएफ द्वारा वर्ष 1998 में चलाए गए कुख्यात अपराधी श्रीप्रकाश शुक्ला के खिलाफ अभियान में भी वह टीम का हिस्सा थे।
इसी प्रकार मुन्ना बजरंगी के खिलाफ की गई कार्रवाई में भी उनके नेतृत्व वाली टीम की भूमिका का उल्लेख विभिन्न सार्वजनिक विवरणों में मिलता है। इन अभियानों ने उस दौर में उत्तर प्रदेश में संगठित अपराध के खिलाफ पुलिस की रणनीति को नई पहचान दी।
सम्मान और उपलब्धियां
उत्कृष्ट पुलिस सेवा के लिए राजेश कुमार पाण्डेय को भारत के राष्ट्रपति द्वारा चार बार पुलिस वीरता पदक से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें सराहनीय सेवा पदक तथा संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन (कोसोवो) में योगदान के लिए संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षा पदक भी प्राप्त हुआ।
सेवानिवृत्ति के बाद भी चर्चा में
30 जून 2021 में पुलिस महानिरीक्षक (आईजी), बरेली के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद भी राजेश कुमार पाण्डेय का नाम उत्तर प्रदेश पुलिस के अनुभवी अधिकारियों में लिया जाता है। पुलिस प्रशासन, तकनीकी जांच प्रणाली और अपराध नियंत्रण के क्षेत्र में उनके योगदान का उल्लेख समय-समय पर किया जाता रहा है।
क्यों खास हैं राजेश कुमार पाण्डेय?
- विज्ञान से पुलिस सेवा में आने वाले चुनिंदा वरिष्ठ अधिकारियों में शामिल।
- उत्तर प्रदेश STF के शुरुआती सदस्यों में स्थान।
- ATS और आतंकवाद विरोधी अभियानों का लंबा अनुभव।
- कई बड़े जिलों में एसएसपी और एसपी के रूप में सेवाएं।
- राष्ट्रपति द्वारा चार बार वीरता पदक से सम्मानित।
- आधुनिक पुलिस सर्विलांस सिस्टम को मजबूत करने में योगदान।













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