पटना। असम के जोरहाट में हाल ही में हुए भारतीय वायुसेना के विमान हादसे में शहीद हुए बिहार निवासी फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार की शहादत के बाद उनके परिवार और पत्नी के बीच उत्पन्न परिस्थितियां चर्चा का विषय बन गई हैं। बिहार सरकार द्वारा प्रदान की गई आर्थिक सहायता को लेकर सामाजिक और भावनात्मक स्तर पर सवाल उठ रहे हैं, हालांकि कानूनी प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप बताया जा रहा है।
गौरतलब है कि जोरहाट में हुए विमान हादसे में भारतीय वायुसेना के पांच कर्मियों का निधन हो गया था, जिनमें बिहार के रहने वाले फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार भी शामिल थे। शहीद अधिकारी के आश्रित के रूप में दर्ज श्रेया राय को बिहार सरकार की ओर से 21 लाख रुपये की अनुग्रह सहायता राशि का चेक सौंपा गया।
जानकारी के अनुसार, शुभम कुमार और श्रेया राय की औपचारिक शादी अगले वर्ष प्रस्तावित थी, लेकिन दोनों ने पूर्व में कोर्ट मैरिज कर ली थी। बताया जा रहा है कि इस विवाह की जानकारी शुभम के परिवार को नहीं थी। सरकारी अभिलेखों में पत्नी के रूप में दर्ज होने के कारण सहायता राशि श्रेया राय को प्रदान की गई।
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वहीं, सहायता राशि मिलने के बाद श्रेया राय के अपने मायके लौट जाने पर शहीद के परिवार ने नाराजगी व्यक्त की है। परिवार का कहना है कि इस कठिन समय में उन्हें भावनात्मक सहयोग और पारिवारिक जिम्मेदारियों में सहभागिता की अपेक्षा थी।
शहीद के पिता अमरेंद्र शर्मा ने कहा कि यदि उनके पुत्र ने श्रेया राय से विधिवत विवाह किया था तो वह उनकी बहू हैं और सरकारी सहायता राशि पर उनका पूरा अधिकार है। हालांकि उनका मानना है कि परिवार के दुख की घड़ी में अंतिम संस्कार एवं श्राद्धकर्म जैसी पारिवारिक जिम्मेदारियों में भी सहभागिता होनी चाहिए थी।
फिलहाल यह मामला कानूनी से अधिक सामाजिक और भावनात्मक चर्चा का विषय बना हुआ है। वहीं, प्रशासनिक स्तर पर सहायता राशि का वितरण निर्धारित नियमों और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर किया गया है।
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