रिपोर्ट:- शरद मिश्रा
लखीमपुर खीरी। जिला पुलिस के मालखाने से वर्षों पहले गायब हुई कथित जेवरात की पोटली का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। न्यायालय की सख्त टिप्पणियों के बाद यह प्रकरण सुर्खियों में है, वहीं पुलिस विभाग ने पूरे मामले पर अपना पक्ष रखते हुए विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक पुराने आपराधिक मुकदमे से संबंधित सोने-चांदी के जेवरात पुलिस मालखाने में सुरक्षित रखे गए थे। न्यायालय में सुनवाई के दौरान जब संबंधित जेवरों को प्रस्तुत करने की बात आई तो वे उपलब्ध नहीं मिले। इस पर अदालत ने गंभीर नाराजगी जताते हुए कहा कि बहुमूल्य आभूषणों के गायब होने को सामान्य लापरवाही नहीं माना जा सकता। न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई और पीड़ित पक्ष को क्षतिपूर्ति देने के निर्देश दिए।
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मामले के तूल पकड़ने के बाद पुलिस ने प्रेस नोट जारी कर बताया कि संबंधित प्रकरण की जांच काफी पहले की जा चुकी है। पुलिस के अनुसार मृतका के शव से बरामद कपड़ों एवं गहनों की एक पोस्टमार्टम पोटली मालखाने में जमा कराई गई थी, जिसका प्रभार तत्कालीन हेड मोहर्रिर के पास था।
पुलिस का कहना है कि जांच में यह तथ्य सामने आया था कि उक्त पोटली दो अलग-अलग कार्यकाल में रहे हेड मोहर्रिरों की जिम्मेदारी के दौरान ही मालखाने से गायब हुई। दुर्भाग्यवश दोनों कर्मचारियों का निधन हो चुका है, जिसके चलते उनके विरुद्ध विधिक कार्रवाई संभव नहीं रही। इसी आधार पर विवेचना पूरी कर अंतिम रिपोर्ट न्यायालय को भेजी जा चुकी है।
हालांकि न्यायालय की हालिया टिप्पणियों ने पुलिस मालखानों में साक्ष्यों और जब्त संपत्तियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में अभिरक्षा में रखी गई संपत्ति की जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है, ताकि न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि न्यायालय के निर्देशों के बाद मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है और जिम्मेदारी तय करने के लिए कौन से कदम उठाए जाते हैं।
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