रिपोर्ट:- शरद मिश्रा
सीतापुर। सीतापुर पुलिस ने ऐसे दंपती को गिरफ्तार किया है, जिस पर फर्जी बैंक अधिकारी और आयकर विभाग का कर्मचारी बनकर लोगों से लाखों रुपये ठगने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने सस्ते दाम पर सोना दिलाने और पुराने नोट बदलवाने का झांसा देकर करीब 27 लाख रुपये की रकम हासिल की थी।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रोहित बाजपेयी और उसकी पत्नी अन्नू बाजपेयी उर्फ चंद्रा के रूप में हुई है। दोनों ने सीतापुर के प्रेम नगर क्षेत्र में किराए का मकान लिया था। आरोप है कि रोहित खुद को पंजाब नेशनल बैंक की मिश्रिख शाखा का प्रबंधक बताकर लोगों पर प्रभाव डालता था, जबकि उसकी पत्नी अन्नू आयकर विभाग की इंस्पेक्टर बनकर लोगों को अपने विश्वास में लेती थी।
पुलिस जांच के मुताबिक, दंपती लोगों को सरकारी नीलामी में बेहद कम कीमत पर सोना मिलने की बात बताता था। इसी तरह कटे-फटे या पुराने नोट बदलवाने का भरोसा देकर भी रकम ली जाती थी। पुलिस का कहना है कि एक शिकायतकर्ता रामनरेश जायसवाल से 22 लाख रुपये लिए गए, जबकि अन्य लोगों से भी एक लाख और चार लाख रुपये की रकम लेने की जानकारी सामने आई है।
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पुलिस के मुताबिक, 14 सितंबर को करीब 27 लाख रुपये लेकर आरोपी सीतापुर से निकल गए थे। इसके बाद दोनों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए आगरा, कोटा, बैतूल और चेन्नई समेत कई स्थानों पर ठिकाने बदले। पुलिस टीम ने तलाश के बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 14 लाख रुपये नकद, करीब 38.740 ग्राम सोने के आभूषण, पंजाब नेशनल बैंक के शाखा प्रबंधक की कथित फर्जी आईडी, आयकर विभाग का पहचान पत्र, कूटरचित आधार और पैन कार्ड तथा दो नए एंड्रॉयड मोबाइल फोन समेत अन्य सामान बरामद किया है।
पुलिस के अनुसार पूछताछ में आरोपियों के वर्ष 2005 से धोखाधड़ी की घटनाओं में शामिल होने की जानकारी मिली है। पुलिस का दावा है कि जांच के दौरान कई राज्यों में इसी तरह की ठगी से जुड़े मामलों के बारे में भी जानकारी सामने आई है।
यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक अंकुर अग्रवाल के निर्देशन में कोतवाली नगर पुलिस और SWAT टीम ने की। पुलिस टीम की कार्रवाई पर 25 हजार रुपये के पुरस्कार की घोषणा भी की गई है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि कोई व्यक्ति खुद को बैंक अधिकारी, आयकर अधिकारी या किसी अन्य सरकारी विभाग का कर्मचारी बताकर आर्थिक लेनदेन की बात करे तो पहले उसकी पहचान और संबंधित विभाग से जानकारी की पुष्टि करें। सस्ते सोने, सरकारी नीलामी या किसी विशेष योजना के नाम पर बिना सत्यापन के बड़ी रकम देना आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है।
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