लखीमपुर खीरी। मैगलगंज थाना क्षेत्र में सामने आए दोमुंहे सांप यानी रेड सैंड बोआ की तस्करी के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। वन्यजीव तस्करी के आरोप में पकड़े गए युवकों से जुड़े मामले की जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिसकर्मियों पर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। वसूली और कथित तौर पर रकम लेकर आरोपियों को छोड़ने के आरोपों की जांच के बाद आठ पुलिसकर्मियों तथा एक निजी व्यक्ति समेत नौ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
मामला रहजनिया अंडरपास के पास से शुरू हुआ था, जहां पुलिस ने एक सफेद अर्टिगा कार को रोककर तीन युवकों को पकड़ा था। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार युवकों की पहचान मोनू सिंह, अंकित मौर्य और पुष्कर सिंह उर्फ सोल्जर के रूप में हुई थी। तलाशी के दौरान कार से दो जीवित रेड सैंड बोआ, चार मोबाइल फोन बरामद होने का दावा किया गया था। इस दौरान तीन अन्य लोगों के मौके से भाग जाने की बात भी सामने आई थी। बरामद सांपों को वन विभाग के सुपुर्द करते हुए गिरफ्तार युवकों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत कार्रवाई की गई थी।
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मामले ने उस समय नया तूल पकड़ लिया, जब गिरफ्तार युवकों के परिजनों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए। परिजनों का आरोप था कि युवकों को हिरासत में रखने के दौरान उनसे पैसों की मांग की गई और रकम दिए जाने के बाद भी युवकों को कथित रूप से निजी स्थान पर रखा गया। करीब दो लाख रुपये एक बैंक खाते में भेजे जाने का दावा भी सामने आया। जांच के दौरान जिस खाते का जिक्र हुआ, उसके धारक को भी अब मुकदमे में आरोपी बनाया गया है।
मामले में हिरासत के दौरान मारपीट और धमकी देने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
शिकायतों के बाद कराई गई प्राथमिक जांच में पुलिसकर्मियों की भूमिका पर सवाल उठे। इसके बाद तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक संजीव कुमार सिंह, उपनिरीक्षक शुभम कुमार, मुख्य आरक्षी देवेंद्र सिंह यादव तथा आरक्षी देवेंद्र सिसोदिया, राहुल कुमार, रोहित कुमार, विश्वास सिंह और अमित कुमार यादव को निलंबित कर दिया गया था।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक जांच में मामले से जुड़े आरोपियों के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई न किए जाने तथा कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही से संबंधित तथ्य सामने आए। इसके बाद प्रकरण की विस्तृत जांच एएसपी पश्चिमी को सौंपी गई। अब पुलिसकर्मियों समेत नौ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद यह मामला महज वन्यजीव तस्करी तक सीमित न रहकर पुलिस की कार्यप्रणाली और कथित वसूली के आरोपों की जांच तक पहुंच गया है।
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