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कभी कांग्रेस का गढ़, फिर सपा-बसपा और भाजपा का दौर… निघासन की जनता ने हर दल को परखा।।

By: दीप मिश्रा संपादक

On: Saturday, July 25, 2026 8:34 PM

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रिपोर्ट:- शरद मिश्रा (प्रतिभा टाइम्स)
निघासन (लखीमपुर खीरी)। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के साथ ही राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता अपनी-अपनी ताकत दिखाने में जुट गए हैं। आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो चुका है। ऐसे में निघासन विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास बेहद दिलचस्प रहा है। यहां की जनता ने समय-समय पर लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक दलों को सत्ता तक पहुंचाया है।

1957 से शुरू हुआ चुनावी सफर

निघासन विधानसभा उत्तर प्रदेश की निर्वाचन क्षेत्र संख्या-138 है। यह लखीमपुर खीरी जिले में स्थित है और खीरी लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। इस सीट पर पहला विधानसभा चुनाव वर्ष 1957 में हुआ था।

  • 1957: सुरथ बहादुर शाह
  • 1962: रामचरण शाह (जनसंघ)
  • 1967: करन सिंह (कांग्रेस)
  • 1969: करन सिंह (कांग्रेस)
  • 1974: रामचरण शाह (जनसंघ)
  • 1977: रामचरण शाह (जनता पार्टी)
  • 1980: सतीश अजमानी (कांग्रेस)
  • 1985: सतीश अजमानी (कांग्रेस)

1985 तक रहा कांग्रेस का दबदबा

निघासन विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने कुल पांच बार जीत दर्ज कर अपना मजबूत वर्चस्व कायम किया। लेकिन वर्ष 1985 के बाद इस सीट की राजनीति ने नया मोड़ लिया और मतदाताओं ने दूसरे दलों को भी अवसर देना शुरू कर दिया।

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हर दल को मिला जनता का समर्थन

1989 और 1991 में निर्वेंद्र कुमार मुन्ना ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज कर सबको चौंका दिया। इसके बाद 1993 में उन्होंने समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक पकड़ बरकरार रखी।

  • 1996: रामकुमार वर्मा (भाजपा)
  • 2002: आर.एस. कुशवाहा (बसपा)
  • 2007: कृष्ण गोपाल पटेल (सपा)
  • 2012: अजय मिश्र ‘टेनी’ (भाजपा)

उपचुनावों ने भी बदली राजनीति

2014 में अजय मिश्र टेनी के सांसद बनने के बाद हुए उपचुनाव में समाजवादी पार्टी के कृष्ण गोपाल पटेल ने जीत दर्ज की। इसके बाद 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के रामकुमार वर्मा ने सीट पर फिर कब्जा जमाया।

रामकुमार वर्मा के आकस्मिक निधन के बाद वर्ष 2019 में हुए उपचुनाव में भाजपा ने उनके पुत्र शशांक वर्मा को उम्मीदवार बनाया। उन्होंने 1,20,269 वोट हासिल कर समाजवादी पार्टी के कय्यूम खान को 52,342 मतों के बड़े अंतर से पराजित किया।

2022 में भी भाजपा ने बरकरार रखी जीत

वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी शशांक वर्मा ने समाजवादी पार्टी के आर.एस. कुशवाहा को हराकर लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की और सीट पर भाजपा का कब्जा कायम रखा।

2027 में किस पर जताएगी जनता भरोसा?

निघासन विधानसभा का इतिहास बताता है कि यहां की जनता ने किसी एक दल को स्थायी रूप से सत्ता नहीं सौंपी। कांग्रेस, भाजपा, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और निर्दलीय उम्मीदवारों तक को जनता ने मौका दिया है। अब सभी की निगाहें वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव पर टिकी हैं। देखना दिलचस्प होगा कि इस बार निघासन की जनता किस पार्टी के सिर जीत का ताज सजाती है।

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