प्रतिभा टाइम्स की पड़ताल में सामने आई तस्वीर, कई ग्राम पंचायतों में शौचालयों का उद्देश्य हुआ बेकार
रिपोर्ट:- शरद मिश्रा
निघासन (लखीमपुर खीरी)। लखीमपुर खीरी के विकासखंड निघासन की कई ग्राम पंचायतों में स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनाए गए व्यक्तिगत शौचालयों की जमीनी हकीकत उम्मीदों से बिल्कुल अलग नजर आई। प्रतिभा टाइम्स की टीम ने जब विभिन्न गांवों में जाकर इन शौचालयों की स्थिति का जायजा लिया, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
सरकार की ओर से ग्रामीणों को खुले में शौच से मुक्ति दिलाने और स्वच्छता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लाखों रुपये खर्च कर शौचालयों का निर्माण कराया गया था। लेकिन कई स्थानों पर इन शौचालयों का उपयोग अपने मूल उद्देश्य के बजाय अन्य कार्यों के लिए किया जा रहा है।
पड़ताल के दौरान कई शौचालयों में गाय के गोबर से बने उपले भरे मिले, जबकि कुछ शौचालय बोरियां, घरेलू सामान और अन्य सामग्री रखने के गोदाम के रूप में इस्तेमाल होते पाए गए। इससे स्पष्ट है कि बड़ी संख्या में लाभार्थी शौचालयों का नियमित उपयोग नहीं कर रहे हैं।
इतना ही नहीं, कई ग्राम पंचायतों में निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हुए। कहीं शौचालयों की दीवारें गिर चुकी थीं, तो कहीं केवल ढांचा खड़ा था और निर्माण अधूरा या बेहद कमजोर गुणवत्ता का दिखाई दिया। इससे निर्माण कार्य में संभावित अनियमितताओं की आशंका भी जताई जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई जगह शौचालय बनने के बाद उनकी देखरेख और उपयोग को लेकर कोई प्रभावी जागरूकता अभियान नहीं चलाया गया। वहीं, कुछ लोगों ने निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए।
ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब करोड़ों रुपये खर्च कर शौचालय बनाए गए, तो क्या उनका वास्तविक उद्देश्य पूरा हो पा रहा है? यदि शौचालय उपला घर और गोदाम बनकर रह जाएं तथा कई निर्माण कुछ ही समय में जर्जर हो जाएं, तो स्वच्छ भारत मिशन के लक्ष्यों पर भी सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।
अब जरूरत है कि संबंधित विभाग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए, निर्माण की गुणवत्ता की समीक्षा करे और जिन ग्राम पंचायतों में शौचालयों का दुरुपयोग हो रहा है, वहां जनजागरूकता और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इससे सरकारी धन का सही उपयोग हो सकेगा और स्वच्छ भारत मिशन का उद्देश्य भी सार्थक होगा।
आखिर कौन है पीसीएस अधिकारी यदुवीर सिंह, जिन्हें तहसील निघासन का बनाया गया उपजिलाधिकारी।











