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मोहाना नदी का रौद्र रूप, 150 परिवारों पर मंडराया विस्थापन का खतरा।

By: दीप मिश्रा संपादक

On: Tuesday, September 1, 2026 9:15 PM

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रिपोर्ट:- शरद मिश्रा
लखीमपुर खीरी। मोहाना नदी इन दिनों रौद्र रूप में है। निघासन तहसील के तिकुनिया क्षेत्र में नदी का जलस्तर बढ़ने और कटान तेज होने से जसनगर, नया पिंड समेत कई गांवों में बाढ़ के हालात गंभीर हो गए हैं। बढ़ते जलस्तर और कटान के चलते करीब 150 परिवारों के सामने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने की नौबत आ गई है। नदी किनारे स्थित एक छोटा प्राचीन मंदिर भी अब बाढ़ और कटान के खतरे की जद में है। मंदिर के आसपास लगातार हो रहे कटान से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।
ग्रामीणों का आरोप है कि गंभीर हालात के बावजूद उन्हें प्रशासन की ओर से अब तक पर्याप्त राहत और मदद नहीं मिल सकी है। वहीं सड़क और रेलवे ट्रैक को कटान से बचाने के लिए बचाव कार्य जारी है। ग्रामीणों के मुताबिक बाढ़ नियंत्रण और राहत कार्यों के लिए करीब पांच करोड़ रुपये की धनराशि से कटान रोकने का काम कराया जा रहा है।
हालांकि बचाव कार्य की गुणवत्ता और समय को लेकर ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जसनगर में कटान रोकने के लिए कच्ची ईंटों को प्लास्टिक की बोरियों में भरकर नदी में डाला जा रहा है। उनका कहना है कि नदी की गहराई और तेज बहाव के कारण ईंटों से बनाए जा रहे अस्थायी अवरोध नदी में समा जा रहे हैं। ग्रामीणों का सवाल है कि यदि कटान रोकने का काम दो महीने पहले शुरू कर दिया जाता तो शायद गांव को मौजूदा संकट तक पहुंचने से बचाया जा सकता था।
ग्रामीण इन कार्यों को खानापूर्ति बताते हुए स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं। कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए अब आनन-फानन में बचाव कार्य कराया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि वे खुद मजदूरों की तरह सड़क और रेलवे ट्रैक को कटान से बचाने के काम में जुटे हैं। वहीं प्रधान के भट्टे से ईंटें खरीदकर बचाव कार्य में लगाए जाने को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं।
बाढ़ और कटान के बीच ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ा सवाल उनकी सुरक्षा और विस्थापन का है। ग्रामीणों की मांग है कि प्रभावित परिवारों तक तत्काल राहत पहुंचाई जाए और जसनगर, नया पिंड समेत अन्य गांवों को मोहाना नदी के कटान से बचाने के लिए अस्थायी इंतजामों के बजाय स्थायी सुरक्षा व्यवस्था की जाए।
उधर, धौरहरा क्षेत्र में भी बाढ़ का संकट गहराता जा रहा है। नेपाल सीमा से छोड़ा गया पानी इलाके में पहुंचने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में हालात बिगड़ने लगे हैं। सुरक्षा के मद्देनजर कई ग्रामीण इलाकों के स्कूल बंद किए गए हैं और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम किया जा रहा है। मौजूदा हालात को देखते हुए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य तेज किए जाने की जरूरत है, ताकि लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

21 अफसरों का सेवाकाल पूरा, IAS-IPS समेत कई वरिष्ठ अधिकारी रिटायर।।

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