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झंडी स्टेट में धूमधाम से मना विजयदशमी का पर्व, राजा राज राजेश्वर सिंह ने किया शस्त्र, गद्दी और अश्व पूजन।

By: दीप मिश्रा संपादक

On: Wednesday, October 21, 2026 1:55 PM

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रिपोर्ट:- शरद मिश्रा
निघासन, लखीमपुर खीरी। तराई की ऐतिहासिक विरासत और राजपरंपराओं के प्रतीक झंडी स्टेट में विजयदशमी का पर्व इस वर्ष भी पूरे हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। झंडी महल में आयोजित दशहरा उत्सव में झंडी स्टेट के राजा राज राजेश्वर सिंह सहित पूरा राजपरिवार मौजूद रहा। इस अवसर पर पौराणिक मंदिरों में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। साथ ही गद्दी पूजन, शस्त्र पूजन और अश्व पूजन कर सदियों पुरानी परंपराओं का निर्वहन किया गया।

विजयदशमी के अवसर पर झंडी महल में धार्मिक आस्था, राजपरंपरा और ऐतिहासिक गौरव का अनूठा संगम देखने को मिला। राजा राज राजेश्वर सिंह ने सभी का अभिवादन किया। राजपरिवार की मौजूदगी में संपन्न हुए इस आयोजन ने झंडी स्टेट की ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत को एक बार फिर जीवंत कर दिया।

चार सौ साल पुराना है झंडी स्टेट का इतिहास

बताया जाता है कि झंडी स्टेट की नींव मुगल बादशाह जहांगीर के शासनकाल में लगभग चार सौ वर्ष पूर्व जांगड़ा राजपूतों ने रखी थी। राजस्थान के जालौर जिले से यह राजपरिवार अपने परिवार के साथ आकर लालपुर में बसा था। समय के साथ इस क्षेत्र में राजपरिवार को विभिन्न प्राकृतिक और अन्य आपदाओं का सामना करना पड़ा।

ऐसी मान्यता है कि इन परिस्थितियों से मुक्ति का मार्ग तलाशते हुए लगभग डेढ़ सौ वर्ष पूर्व राजा लालता सिंह ने बरम बाबा नामक सिद्ध पुरुष से मार्गदर्शन लिया। इसके बाद उन्होंने एकांत स्थान पर विशेष पूजा-पाठ शुरू कराया। परंपरागत मान्यताओं के अनुसार, पूजा संपन्न होने के बाद बाबा ने वहां एक दिव्य झंडी स्थापित कर इसी स्थान पर राजमहल बनाने की सलाह दी। इसके बाद यहां महल की नींव रखी गई और इसी झंडी के नाम पर यह स्थान झंडीराज के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

राजमहल और मंदिर आज भी हैं ऐतिहासिक गौरव के प्रतीक

झंडी महल और राजपरिवार द्वारा बनवाए गए प्राचीन मंदिर आज भी इस क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान और गौरव को दर्शाते हैं। विजयदशमी पर मंदिरों में पूजा-अर्चना तथा शस्त्र, गद्दी और अश्व पूजन जैसी परंपराओं का निर्वहन राजपरिवार की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का प्रतीक है।

सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहता है राजपरिवार

झंडी राजपरिवार धार्मिक और पारंपरिक आयोजनों के साथ क्षेत्र के सामाजिक कार्यों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता है। स्थानीय स्तर पर जरूरतमंद लोगों की सहायता और जनकल्याण से जुड़े कार्यों में राजपरिवार की भागीदारी क्षेत्र में उसकी सामाजिक भूमिका को भी रेखांकित करती है।
झंडी स्टेट में विजयदशमी का यह आयोजन केवल एक धार्मिक पर्व तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत, पारंपरिक मान्यताओं और राजपरिवार की सांस्कृतिक पहचान की झलक भी प्रस्तुत की।

रमियाबेहड़ में भक्ति की बही धारा, राजा राज राजेश्वर सिंह का पगड़ी पहनाकर हुआ स्वागत।

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