रिपोर्ट:- शरद मिश्रा
निघासन (लखीमपुर खीरी)। निघासन क्षेत्र में भीषण बारिश और बाढ़ के बाद अब ग्रामीणों के सामने एक नई समस्या खड़ी हो गई है। बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रभावित गांवों में गंदगी, दुर्गंध और मच्छरों का प्रकोप बढ़ने लगा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में डेंगू, मलेरिया समेत मच्छर जनित बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ गई है। इसके बावजूद बाढ़ प्रभावित गांवों में फॉगिंग और कीटनाशक दवाओं के छिड़काव की व्यवस्था नहीं किए जाने से ग्रामीणों की चिंता बढ़ रही है।
बीते दिनों आई भीषण बाढ़ ने निघासन क्षेत्र के कई ग्रामीण इलाकों को प्रभावित किया था। बाढ़ का पानी अपने साथ गंदगी और कचरा बहाकर गांवों तक ले आया। अब पानी उतरने के बाद कई स्थानों पर जमा गंदगी और नमी के कारण दुर्गंध फैल रही है। वहीं, मच्छरों की बढ़ती संख्या ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बनती जा रही है।
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बाढ़ के बाद बीमारियों का खतरा, ग्रामीणों को सता रही चिंता
ग्रामीण क्षेत्रों में मच्छरों का बढ़ता प्रकोप लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकता है। डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियां मच्छरों के काटने से फैलती हैं। ऐसे में बाढ़ प्रभावित गांवों में समय रहते साफ-सफाई, जलभराव का निस्तारण और मच्छरों की रोकथाम के उपाय करना जरूरी है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से कमजोर स्वास्थ्य वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
फॉगिंग और दवा के छिड़काव की उठी जरूरत
ग्रामीणों की परेशानी इसलिए भी बढ़ रही है क्योंकि उनके अनुसार, बाढ़ प्रभावित गांवों में अब तक फॉगिंग और दवाओं के छिड़काव की व्यवस्था नहीं की गई है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में मच्छरों पर नियंत्रण को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जरूरत है कि संबंधित विभाग प्रभावित गांवों में साफ-सफाई अभियान चलाएं, नालियों और जलभराव वाले स्थानों की सफाई कराएं तथा मच्छरों से बचाव के लिए फॉगिंग और आवश्यक दवाओं का छिड़काव कराएं।
बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रभावित गांवों में संक्रमण और मच्छर जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए समय रहते प्रभावी कदम उठाना जरूरी है, ताकि ग्रामीणों को संभावित स्वास्थ्य संकट से बचाया जा सके।
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