रिपोर्ट:- शरद मिश्रा
लखीमपुर खीरी:- लगातार दो दिनों से हो रही भारी बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में लहलहाती और पककर तैयार होने की कगार पर पहुंची धान की फसल कई इलाकों में जमीन पर बिछ गई है। कहीं फसल पूरी तरह पानी में डूब गई है तो कहीं तेज हवा के थपेड़ों ने खेतों में खड़ी धान की बालियों को जमीन पर गिरा दिया है। महीनों की मेहनत को अपनी आंखों के सामने बर्बाद होता देख किसानों के चेहरे पर मायूसी और आंखों में आंसू नजर आ रहे हैं।
किसानों का कहना है कि धान की फसल तैयार करने में उन्होंने अपनी जमा पूंजी के साथ-साथ उधार लेकर भी पैसा लगाया है। खेत तैयार करने से लेकर बीज, खाद, सिंचाई, दवा और मजदूरी तक में हजारों रुपये खर्च किए गए। दिन-रात मेहनत कर जिस फसल को तैयार किया था, अब वही फसल बारिश के पानी में खेतों में बिछी पड़ी है। किसानों को सबसे ज्यादा चिंता इस बात की है कि यदि मौसम जल्द साफ नहीं हुआ तो गिरी हुई फसल में नमी बढ़ने से सड़न शुरू हो सकती है।
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कई किसानों का कहना है कि खेतों में पड़ी धान की फसल को समय रहते संभालना बेहद जरूरी है। लगातार बारिश के कारण खेतों में पानी भरा होने से फसल को उठाना भी मुश्किल हो रहा है। यदि धूप नहीं निकली और खेतों से पानी नहीं निकला तो धान की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ उपज में भी भारी कमी आ सकती है। ऐसे में किसानों के सामने केवल फसल बचाने की चुनौती नहीं, बल्कि अपनी पूरी लागत डूबने का डर भी खड़ा हो गया है।
एक किसान ने मायूसी भरे शब्दों में कहा कि जिस फसल को तैयार करने में कई महीने खेत में पसीना बहाया, उसे आंखों के सामने जमीन पर पड़ा देखना बेहद पीड़ादायक है। उम्मीद थी कि फसल घर पहुंचेगी तो परिवार की जरूरतें पूरी होंगी और कर्ज का कुछ हिस्सा चुकाया जा सकेगा, लेकिन बारिश ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
फसल खराब होने की स्थिति में किसानों के सामने पशुओं के चारे का संकट भी खड़ा होने की आशंका है। खेतों में तैयार फसल यदि पूरी तरह खराब हो गई तो पशुओं के लिए उपलब्ध चारे पर भी इसका असर पड़ सकता है।
लगातार खराब मौसम ने किसानों की परेशानी दोगुनी कर दी है। एक तरफ खेतों में बर्बाद हो रही फसल बचाने की जद्दोजहद है तो दूसरी तरफ आसमान से बरसता पानी नुकसान बढ़ाने का डर पैदा कर रहा है।
किसानों की निगाहें अब आसमान पर टिकी हैं। हर किसान यही दुआ कर रहा है कि बारिश थमे, बादल छंटें और कुछ देर के लिए धूप निकल आए, ताकि खेतों में गिरी फसल को किसी तरह संभाला जा सके। किसानों का कहना है कि यदि मौसम ने साथ दिया तो शायद मेहनत की कुछ फसल बच जाए, लेकिन बारिश का सिलसिला जारी रहा तो कई परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।
जिस खेत में कुछ दिन पहले तक किसान अपनी सुनहरी फसल देखकर खुश था, आज वहीं जमीन पर बिखरी धान की बालियां उसकी बेबसी की कहानी कह रही हैं। किसानों के लिए यह सिर्फ फसल का नुकसान नहीं है, बल्कि महीनों की मेहनत, खर्च किए गए पैसे और परिवार की उम्मीदों के टूटने का दर्द है।
बारिश ने छीनी तीन जिंदगियां, कच्ची दीवार और छप्पर गिरने से परिवार तबाह।
















