रिपोर्ट:- शरद मिश्रा
निघासन खीरी। दीपावली का त्योहार जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे कुम्हारों के घरों में चाक की रफ्तार तेज होने लगी है। दीपावली का पर्व मिट्टी के दीयों के बिना अधूरा माना जाता है। भले ही आधुनिक दौर में रंग-बिरंगी बिजली की झालरों और आकर्षक लाइटों ने अपनी जगह बना ली हो, लेकिन पारंपरिक मिट्टी के दीयों की चमक आज भी बरकरार है। यही वजह है कि दीपावली से पहले कुम्हार दिन-रात दीये बनाने में जुट जाते हैं। हालांकि, इस बार निघासन क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने कुम्हारों के पारंपरिक कारोबार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
दीपावली का त्योहार कुम्हारों के लिए सालभर की उम्मीद लेकर आता है। उन्हें आशा रहती है कि इस पर्व पर मिट्टी के दीयों की अच्छी बिक्री होगी, जिससे परिवार के त्योहार की खुशियां भी दोगुनी हो सकेंगी। इसी उम्मीद में कुम्हार दीपावली से करीब एक सप्ताह पहले ही मिट्टी के दीये लेकर गांव-गांव और बाजारों में बिक्री के लिए निकल पड़ते हैं।

बाढ़ ने बढ़ाई मिट्टी की किल्लत, उत्पादन पर पड़ा असर
इस बार दीपावली से करीब दो दिन पहले आई भीषण बाढ़ ने कुम्हारों की तैयारियों को प्रभावित कर दिया है। क्षेत्र के कई स्थानों पर पानी भरने के कारण मिट्टी आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रही है। ऐसे में कुम्हारों को दीये बनाने के लिए दूर-दराज से मिट्टी लानी पड़ रही है। मिट्टी की कमी और उसे लाने में बढ़े खर्च के चलते दीयों का उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। कुम्हार पहले की अपेक्षा कम मात्रा में दीये तैयार कर पा रहे हैं।
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महंगे हुए मिट्टी के दीये, 90-100 से बढ़कर 120-150 रुपये प्रति सैकड़ा पहुंचे दाम
दीयों के कारोबार से जुड़े लोगों के मुताबिक, इस बार मिट्टी के दीयों के दामों में भी बढ़ोतरी हुई है। पहले ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे मिट्टी के दीये 90 से 100 रुपये प्रति सैकड़ा बिकते थे, लेकिन इस बार इनके दाम बढ़कर 120 से 150 रुपये प्रति सैकड़ा तक पहुंच गए हैं। कारोबारियों का कहना है कि बाढ़ के चलते मिट्टी की उपलब्धता कम होने और दूर से मिट्टी लाने के कारण लागत बढ़ गई है।
दीपावली की रोशनी से जगी बेहतर बिक्री की उम्मीद
मुश्किलों के बावजूद कुम्हारों को उम्मीद है कि दीपावली पर लोग पारंपरिक मिट्टी के दीयों को प्राथमिकता देंगे। उनके लिए यह त्योहार केवल रोशनी और खुशियों का पर्व नहीं, बल्कि सालभर की मेहनत का फल पाने का अवसर भी है। अब देखना होगा कि इस बार दीपावली पर मिट्टी के दीयों की बिक्री कुम्हारों के चेहरों पर कितनी खुशियां ला पाती है।

















