लखीमपुर खीरी। शारदा नदी की धार ने बिजुआ विकासखंड के रुरा सुल्तानपुर में तबाही का दायरा बढ़ा दिया है। लगातार हो रहे कटान के बीच गांव के आशियाने और पेड़ नदी की धारा में समाते जा रहे हैं। शनिवार सुबह एक और मकान के साथ कई हरे-भरे पेड़ भी नदी में विलीन हो गए। हालात बिगड़ने के बाद ग्रामीण सुरक्षित ठिकानों की ओर जाने को मजबूर हैं।
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क्षेत्रीय लेखपाल राजीव वर्मा के अनुसार, अब तक गांव के 11 पक्के और दो कच्चे मकान शारदा नदी में समा चुके हैं। शनिवार को एक और मकान नदी की तेज धारा की भेंट चढ़ गया। ग्रामीणों का कहना है कि नदी की धारा अब गांव की तरफ तेजी से बढ़ रही है, जिससे आने वाले दिनों में खतरा और बढ़ सकता है।
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धार्मिक स्थलों पर भी मंडराया खतरा
कटान की चपेट में गांव के धार्मिक स्थल भी आ गए हैं। प्रसिद्ध वीर बाबा स्थान, शिव मंदिर और माता मंदिर के आसपास नदी का कटान तेज हो गया है। ग्रामीणों के मुताबिक काली माता मंदिर का करीब आधा हिस्सा पहले ही नदी में समा चुका है। इससे लोगों की चिंता और बढ़ गई है।
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सुरक्षित ठिकाने की तलाश में ग्रामीण
लगातार जमीन खिसकने के कारण प्रभावित परिवार अपने सामान को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से जिस जमीन पर उनके घर और पेड़ खड़े थे, वह अब नदी की धारा में खोती जा रही है। कटान के चलते गांव में असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा दिलाने और सुरक्षित स्थान पर बसाने की मांग की है। इसके साथ ही शारदा के कटान को नियंत्रित करने के लिए बोल्डर पिचिंग, बंधे और अन्य सुरक्षा उपाय किए जाने की मांग उठाई है।
प्रशासन की ओर से बताया गया है कि रुरा सुल्तानपुर का क्षेत्र डूब क्षेत्र में आता है। इसी वजह से यहां कटान रोकने के लिए स्थायी निर्माण कार्य नहीं कराया गया है। हालांकि, जिस तेजी से नदी गांव की ओर बढ़ रही है, उससे ग्रामीणों में भविष्य को लेकर चिंता बनी हुई है।
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