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गन्ना विभाग ने किसानों को समय रहते सतर्क रहने की दी सलाह, फसल पर मंडराया रोगों का खतरा।

By: दीप मिश्रा संपादक

On: Friday, July 31, 2026 9:55 PM

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लखनऊ। भारी बारिश ने जहां गन्ने की खेती को बढ़वार का अनुकूल वातावरण दिया है, वहीं यही मौसम कई खतरनाक बीमारियों के फैलने का कारण भी बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान समय रहते खेतों की निगरानी नहीं करेंगे तो रोग तेजी से फैलकर उत्पादन और गुणवत्ता दोनों को प्रभावित कर सकते हैं।
मानसून के दौरान सबसे अधिक लाल सड़न, पोक्का बोइंग, बैक्टीरियल टॉप रॉट और विल्ट जैसे रोगों का रहता है। शुरुआती लक्षण दिखाई देते ही तुरंत उपचार शुरू करना जरूरी है, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही पूरे खेत में संक्रमण फैला सकती है।

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विशेषज्ञों ने किसानों से अपील की है कि वे खेतों का नियमित निरीक्षण करें। यदि गन्ने की को-0238 या को-05011 प्रजाति में लाल सड़न के लक्षण दिखाई दें तो संक्रमित पौधों को जड़ सहित हटाकर नष्ट कर दें। साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि संक्रमित खेत का पानी दूसरे खेतों तक न पहुंचे, ताकि बीमारी का प्रसार रोका जा सके।
इसके अलावा खेतों में जल निकासी की समुचित व्यवस्था, संतुलित पोषण, पर्याप्त नमी बनाए रखना और आवश्यकता पड़ने पर अनुशंसित फफूंदनाशकों का प्रयोग करना भी जरूरी बताया गया है। जैविक और वैज्ञानिक तरीकों का समन्वित उपयोग फसल को सुरक्षित रखने में अधिक प्रभावी माना गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बीमारी के लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत कृषि वैज्ञानिकों या गन्ना विभाग के अधिकारियों से संपर्क करना चाहिए। समय पर उठाया गया एक छोटा कदम किसानों को बड़े आर्थिक नुकसान से बचा सकता है और गन्ने की पैदावार तथा गुणवत्ता दोनों सुरक्षित रख सकता है।

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