लखनऊ। उत्तर प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ से बड़ी राहत मिली है। न्यायमूर्ति राजीव सिंह की पीठ ने उनके खिलाफ शुरू की गई ओपन विजिलेंस जांच को निरस्त कर दिया है। अदालत ने मार्च 2025 में जारी किए गए उन दो आदेशों को भी रद्द कर दिया, जिनके आधार पर विजिलेंस जांच शुरू की गई थी।
मामला एक सोलर कंपनी के अधिकारी विश्वजीत दत्ता की ओर से 20 मार्च 2025 को की गई शिकायत से जुड़ा था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि इन्वेस्ट यूपी के तत्कालीन सीईओ एवं औद्योगिक विकास विभाग के तत्कालीन सचिव अभिषेक प्रकाश से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने दत्ता को निकांत जैन का मोबाइल नंबर उपलब्ध कराया था और उनसे संपर्क करने के लिए कहा था।
शिकायत के अनुसार, निकांत जैन ने कंपनी के प्रोजेक्ट को एम्पावर्ड कमेटी और कैबिनेट से मंजूरी दिलाने के एवज में परियोजना की कुल लागत का पांच प्रतिशत कमीशन मांगा था। शिकायत के बाद निकांत जैन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी की गई थी। मामले में आगे अभिषेक प्रकाश को निलंबित करने के साथ विभागीय कार्रवाई और विजिलेंस जांच के निर्देश दिए गए थे।
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शिकायतकर्ता ने ही बताई गलतफहमी
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान शिकायत से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों पर भी विचार किया गया। अदालत ने यह तथ्य ध्यान में रखा कि मूल शिकायत के साथ कोई शपथपत्र दाखिल नहीं किया गया था। वहीं कंपनी अधिकारी विश्वजीत दत्ता ने अदालत में दाखिल अपने काउंटर एफिडेविट में कहा कि 20 मार्च को की गई शिकायत गलतफहमी के चलते हुई थी।
दत्ता के मुताबिक, उस समय उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि प्रोजेक्ट से संबंधित जमीन की उपलब्धता समेत अन्य मामलों में यीडा और यूपीसीएल की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने निकांत जैन को किसी प्रकार की धनराशि नहीं दी थी।
अदालत ने मामले में निकांत जैन के खिलाफ दर्ज मुकदमे को भी निरस्त कर दिया था। इसके बाद अब अभिषेक प्रकाश के खिलाफ शुरू की गई ओपन विजिलेंस जांच तथा उससे संबंधित मार्च 2025 के दोनों आदेश भी हाईकोर्ट ने रद्द कर दिए हैं।
















