लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने पंचायत व्यवस्था को अधिक प्रभावी और सुदृढ़ बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मंत्रिमंडल की बैठक में वर्ष 2026-27 के लिए राज्य वित्त आयोग से प्राप्त धनराशि का 10 प्रतिशत पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय, पंचायत कर्मियों के वेतन तथा अन्य प्रशासनिक आवश्यकताओं पर खर्च करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है।
सरकार के इस निर्णय के तहत कुल 1,498 करोड़ रुपये पंचायतों के संचालन, तकनीकी एवं प्रशासनिक कर्मचारियों के वेतन, प्रतिनिधियों के मानदेय और अन्य आवश्यक खर्चों पर व्यय किए जाएंगे। अधिकारियों के अनुसार राज्य वित्त आयोग के तहत वर्ष 2026-27 में पंचायतों के लिए लगभग 14,988.50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसमें से निर्धारित 10 प्रतिशत राशि प्रशासनिक व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए उपयोग होगी।
मंजूर प्रस्ताव के अनुसार पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय पर भी सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जबकि शेष राशि पंचायतों में कार्यरत कर्मचारियों के वेतन, तकनीकी सेवाओं और आवश्यक प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर लगाई जाएगी।
सरकार का मानना है कि इस फैसले से पंचायतों की कार्यक्षमता बढ़ेगी, स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों के संचालन में गति आएगी और ग्रामीण प्रशासन को अधिक संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे।
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