रिपोर्ट:- शरद मिश्रा
लखीमपुर खीरी। तराई के वन क्षेत्र में मिले 25 गिद्धों के शवों की जांच रिपोर्ट ने वन्यजीव संरक्षण एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि गिद्धों की मौत अत्यंत जहरीले पेस्टीसाइड “कार्बोफ्यूरान” के असर से हुई। जांच में सामने आया कि गिद्धों ने उन कुत्तों के शवों को खाया था, जिनमें यह खतरनाक रसायन मौजूद था।
कार्बोफ्यूरान कार्बोमेट श्रेणी का बेहद विषैला कृषि रसायन माना जाता है, जिसका इस्तेमाल फसलों में कीट नियंत्रण के लिए किया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार इसकी बहुत कम मात्रा भी पक्षियों और वन्यजीवों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। कई स्थानों पर इसके उपयोग पर कड़े नियम लागू हैं, इसके बावजूद ग्रामीण इलाकों में इसके इस्तेमाल की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए बीते दिनों मुख्य वन संरक्षक संजय पाठक स्वयं लखीमपुर खीरी पहुंचे थे। उन्होंने वन विभाग की टीम के साथ घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए और पूरे प्रकरण की विस्तृत जानकारी ली। अधिकारियों ने घटनास्थल से नमूने एकत्र कर जांच के लिए भेजे थे, जिसके बाद अब रिपोर्ट में जहरीले पेस्टीसाइड की पुष्टि हुई है।
यह घटना इसलिए भी बेहद संवेदनशील मानी जा रही है क्योंकि क्षेत्र विश्वप्रसिद्ध दुधवा टाइगर रिजर्व के प्रभाव क्षेत्र में आता है। नेपाल सीमा से सटे इस तराई क्षेत्र को समृद्ध जैव विविधता और दुर्लभ वन्यजीवों के लिए जाना जाता है। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि गिद्ध प्राकृतिक सफाईकर्मी की भूमिका निभाते हैं और उनकी बड़ी संख्या में मौत पर्यावरणीय संतुलन के लिए गंभीर खतरे का संकेत है।
घटना के बाद वन विभाग और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी संस्थाओं ने जहरीले रसायनों के अनियंत्रित उपयोग पर सख्ती की मांग तेज कर दी है।
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