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एक किसान, कई फसलें और 15 से 20 लोगों को रोजगार, राहुल सिंह की खेती बनी मिसाल।

By: दीप मिश्रा संपादक

On: Wednesday, September 23, 2026 8:23 AM

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कानपुर देहात। मेहनत, लगन और खेती के प्रति जुनून हो तो किसान सीमित संसाधनों में भी नई मिसाल कायम कर सकता है। मलासा गांव निवासी प्रगतिशील किसान राहुल सिंह ने अपनी मेहनत और आधुनिक कृषि तकनीक के सहारे खेती को बेहतर आमदनी के साथ-साथ ग्रामीण रोजगार का माध्यम बनाया है। उनकी खेती में अलग-अलग मौसम और जरूरत के अनुसार कई फसलें तैयार की जा रही हैं, जिससे गांव के करीब 15 से 20 मजदूरों को लगातार काम मिल रहा है।
राहुल सिंह के खेतों में इस समय दो बीघा क्षेत्रफल में खीरे की तुड़ाई चल रही है, जबकि करीब साढ़े पांच बीघा में खीरे की फसल तैयार हो रही है। दो बीघा से अधिक क्षेत्रफल में टमाटर की फसल लगी है, जिसके करीब 15 दिन में तैयार होने की उम्मीद है। वहीं दो बीघा में करेला तैयार होकर बाजार के लिए तोड़ा जा रहा है।

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इसके अलावा 10 बीघा से अधिक क्षेत्रफल में तरबूज की फसल तैयार हो रही है। खेत में लौकी की फसल भी लगी हुई है।
किसान ने खेती में सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए ड्रिप तकनीक अपनाई है। ड्रिप के माध्यम से पौधों की जरूरत के अनुसार समय पर पानी पहुंचाया जा रहा है। इससे पानी की बचत के साथ फसलों की बेहतर देखभाल संभव हो रही है। आधुनिक तकनीक और अलग-अलग फसलों के संयोजन से राहुल सिंह खेती को लगातार नए तरीके से आगे बढ़ाने में जुटे हैं।
राहुल सिंह का कहना है कि खेती उनके लिए सिर्फ परिवार की आय का साधन नहीं, बल्कि गांव के लोगों को रोजगार देने का भी माध्यम है। अलग-अलग फसलों के कारण खेतों में लगातार काम बना रहता है, जिससे स्थानीय मजदूरों को रोजगार मिलता है। मौजूदा समय में उनकी खेती से करीब 15 से 20 लोगों को काम मिल रहा है।
प्रगतिशील किसान का कहना है कि यदि कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं का उचित सहयोग मिले तो खेती का दायरा और बढ़ाया जा सकता है। अधिक क्षेत्रफल में फसलें तैयार होने से उत्पादन बढ़ेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
राहुल सिंह की खेती ग्रामीण क्षेत्र के उन किसानों के लिए उदाहरण बन रही है, जो पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीक और फसल विविधीकरण को अपनाकर अपनी आय बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं। खेतों में खीरा, टमाटर, करेला, तरबूज और लौकी जैसी विभिन्न फसलों की मौजूदगी यह बताती है कि योजनाबद्ध तरीके से खेती को पूरे वर्ष रोजगार और आमदनी का माध्यम बनाया जा सकता है।

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