लखनऊ। अयोध्या स्थित राम मंदिर को स्वर्ण रामचरितमानस भेंट करने वाले पूर्व आईएएस अधिकारी लक्ष्मीनारायणन ने दावा किया है कि उनकी ओर से भेंट की गई रामचरितमानस पिछले काफी समय से मंदिर परिसर में दिखाई नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि कई बार जानकारी लेने के बावजूद उन्हें इसकी वर्तमान स्थिति के बारे में कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला।
पूर्व आईएएस अधिकारी के अनुसार, स्वर्ण रामचरितमानस को मंदिर में स्थापित किए जाने के बाद करीब पांच महीने तक प्रतिदिन उसकी पूजा होती रही और श्रद्धालु भी उसके दर्शन करते थे। इससे उन्हें अत्यंत संतोष था। हालांकि बाद में इसे वहां से हटा दिया गया, जिसके बाद उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों से इसकी जानकारी लेने का प्रयास किया, लेकिन कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला।
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लक्ष्मीनारायणन ने बताया कि हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उनकी मुलाकात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत से हुई। उन्होंने उन्हें पूरी घटना से अवगत कराया। उनके अनुसार, मोहन भागवत ने उनकी श्रद्धा की सराहना करते हुए हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक इस संबंध में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।
पूर्व आईएएस अधिकारी के इस दावे के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि इस संबंध में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में स्वर्ण रामचरितमानस की वर्तमान स्थिति को लेकर स्थिति स्पष्ट होना अभी बाकी है।
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