वन्यजीव संघर्ष पर चल रही थी बैठक, उधर बाघ ने ली एक और जान, ग्रामीणों में दहशत और आक्रोश।।
रिपोर्ट:- शरद मिश्रा
लखीमपुर खीरी। दुधवा और उसके आसपास के क्षेत्रों में इंसान और बाघ के बीच बढ़ता संघर्ष लगातार भयावह होता जा रहा है। सोमवार शाम मझगई क्षेत्र के खालेपुरवा गांव में एक महिला की बाघ के हमले में मौत ने एक बार फिर वन विभाग की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दुधवा की निर्भीक बेटी बनी गांवों की ढाल, खतरे के सामने नहीं झुकता हौसला।
खालेपुरवा गांव निवासी 50 वर्षीय कोकिला देवी रोज की तरह पशुओं के लिए चारा लेने खेत की ओर गई थीं। शाम ढल रही थी और खेतों के आसपास सन्नाटा बढ़ने लगा था। इसी बीच घात लगाए बैठे बाघ ने उन पर हमला बोल दिया। आसपास मौजूद लोगों ने शोर सुनकर दौड़ लगाई, लेकिन तब तक बाघ महिला को घसीटते हुए जंगल की ओर ले जा चुका था।
ग्रामीणों ने काफी देर तक तलाश की। आखिरकार घटना स्थल से कुछ दूरी पर महिला का शव मिला। घटना के बाद गांव में मातम के साथ-साथ दहशत का माहौल भी फैल गया। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से बाघ की मौजूदगी देखी जा रही थी, लेकिन प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।
यह घटना इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि जिस समय यह हादसा हुआ, उसी दिन वन्यजीव और मानव संघर्ष को लेकर उच्च स्तरीय मंथन चल रहा था। वन विभाग के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और विशेषज्ञ भविष्य की रणनीति पर विचार कर रहे थे, जबकि दूसरी ओर एक परिवार अपनी सबसे बड़ी त्रासदी से गुजर रहा था।
पिछले 24 घंटों के भीतर क्षेत्र में बाघ के हमले की यह दूसरी जानलेवा घटना है। लगातार हो रहे हमलों से ग्रामीणों का धैर्य जवाब देने लगा है। लोग खेतों में जाने से डर रहे हैं और बच्चों को घरों से बाहर निकलने से रोका जा रहा है।
वन विभाग की और से मृतका के पति को तत्काल सहायता के रूप में 25 हजार रुपये की आर्थिक मदद प्रदान की गई है। साथ ही बाघ की निगरानी और उसे पकड़ने के लिए क्षेत्र में तीन पिंजरे लगाए गए हैं। विभागीय टीम लगातार गश्त कर रही है और ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। हालांकि ग्रामीणों की मांग है कि केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ऐसा स्थायी समाधान निकाला जाए जिससे गांवों में रहने वाले लोगों की जान सुरक्षित रह सके।
फिलहाल खालेपुरवा और आसपास के गांवों में डर का साया पसरा हुआ है। ग्रामीणों की नजरें अब वन विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
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