रिपोर्ट:- दीप शंकर मिश्र “दीप”
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने संगठन और सरकार के बीच अल्पसंख्यक समाज तक अपनी पहुंच मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। पार्टी से लंबे समय से जुड़े रहे पूर्व मंत्री मोहसिन रजा को उत्तर प्रदेश राज्य अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है। अध्यक्ष पद के साथ उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी दिया जाएगा।
मोहसिन रजा की नियुक्ति को राजनीतिक लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। योगी आदित्यनाथ सरकार के पहले कार्यकाल में अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ और हज विभाग में राज्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके रजा को एक बार फिर अल्पसंख्यक मामलों से जुड़े प्रमुख संस्थान की कमान सौंपी गई है।
रजा विधान परिषद के सदस्य भी रह चुके हैं। ऐसे में सरकार ने उनके प्रशासनिक और राजनीतिक अनुभव को देखते हुए आयोग की जिम्मेदारी दी है। खास बात यह है कि उनकी नियुक्ति ऐसे दौर में हुई है जब वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और कथित अनियमितताओं को लेकर प्रदेश की राजनीति में चर्चा तेज है।
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आयोग में आठ नए सदस्य भी शामिल
अल्पसंख्यक आयोग के पुनर्गठन के तहत अध्यक्ष के साथ आठ सदस्यों को भी नामित किया गया है। इनमें संदीप जैन, अंशुमान कुमार सिंह मैसी, हनप्रीत सिंह बेदी, मोहम्मद असलम, परविंदर सिंह, नेहा खान, सैयद सिराज अब्बास रिजवी और रूमाना सिद्दीकी शामिल हैं।
नए सदस्यों को प्रदेश के अलग-अलग जिलों से प्रतिनिधित्व दिया गया है। इनमें एटा, शाहजहांपुर, मुजफ्फरनगर, फतेहपुर, लखनऊ, अंबेडकरनगर और आजमगढ़ जैसे जिले शामिल हैं।
वक्फ के मुद्दे पर पहले ही सक्रिय रहे हैं रजा
अल्पसंख्यक आयोग की जिम्मेदारी मिलने से पहले ही मोहसिन रजा वक्फ से जुड़े मामलों को लेकर सक्रिय नजर आए थे। 12 अगस्त को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के दौरान उन्होंने प्रदेश के दोनों वक्फ बोर्डों में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया था। उन्होंने जिला स्तर पर वक्फ संपत्तियों की जांच और विशेष ऑडिट की मांग भी रखी थी।
अब आयोग की कमान मिलने के बाद रजा के सामने अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े मुद्दों को उठाने और सरकार की नीतियों को समाज के बीच पहुंचाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी। राजनीतिक गलियारों में इस नियुक्ति को 2027 के चुनाव से पहले भाजपा की अल्पसंख्यक पहुंच की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
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