रिपोर्ट:- शरद मिश्रा
लखीमपुर खीरी। तराई क्षेत्र की महत्वपूर्ण सुहेली नदी को उसके मूल स्वरूप में वापस लाने की उम्मीद मजबूत हुई है। नदी के पुनर्जीवन की दिशा में वैज्ञानिक अध्ययन और डिसिल्टिंग (गाद निकासी) की योजना पर पहल की गई है। इसके लिए 86 लाख 76 हजार रुपये की धनराशि हस्तांतरित किए जाने की बात सामने आई है। योजना के तहत पहले वैज्ञानिकों से नदी का अध्ययन कराया जाएगा। इसके बाद अध्ययन के निष्कर्षों के आधार पर नदी की गाद निकासी और उसे उसके मूल स्वरूप से जोड़ने की दिशा में काम किया जाएगा।
इस संबंध में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के मंत्री की अध्यक्षता में लखनऊ स्थित वन मुख्यालय के पारिजात सभाकक्ष में बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्य वन संरक्षक एवं फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व, लखीमपुर खीरी तथा दुधवा बाघ संरक्षण फाउंडेशन के शासी निकाय से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।

सुहेली नदी के पुनर्जीवन की जगी उम्मीद
सुहेली नदी को उसके मूल स्वरूप में वापस लाने की पहल तराई क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। नदी की वैज्ञानिक तरीके से स्टडी और उसके बाद गाद निकासी की योजना से पुनर्जीवन के प्रयासों को दिशा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, नदी की वास्तविक स्थिति का आकलन वैज्ञानिक अध्ययन के बाद ही हो सकेगा। प्रस्तावित कार्य पूरा होने पर नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बेहतर बनाने की दिशा में मदद मिल सकती है।
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विधायक रोमी साहनी के प्रयासों की सराहना
पलिया विधायक रोमी साहनी द्वारा सुहेली नदी को उसके मूल स्वरूप में वापस लाने के लिए किए गए प्रयासों को सराहनीय बताया जा रहा है। इस पहल से नदी के पुनर्जीवन को लेकर क्षेत्र में उम्मीद बढ़ी है। अब प्रस्तावित धनराशि के हस्तांतरण, वैज्ञानिक अध्ययन और उसके बाद होने वाले कार्यों पर लोगों की निगाहें रहेंगी।
सुहेली नदी का पुनर्जीवन केवल नदी की सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके प्राकृतिक स्वरूप और प्रवाह को समझते हुए योजनाबद्ध तरीके से काम करना भी जरूरी है। ऐसे में वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर आगे बढ़ने की योजना को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

















