लखीमपुर लखनऊ अलीगढ वाराणसी आगरा आजमगढ़ इटावा एटा उन्नाव कनौज कानपूर कासगंज गोरखपुर गाजीपुर कुशीनगर कौशांबी गाज़ियाबाद गौतमबुद्ध नगर चंदौली चित्रकूट जालौन जौनपुर झाँसी देवरिया पीलीभीत प्रतापगढ़ प्रयागराज फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूँ बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बाँदा बारांबकी बिजनौर बुलंदशहर भदोही मऊ मथुरा महाराजगंज महोबा मिर्ज़ापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली ललितपुर शाहजहांपुर श्रावस्ती संत कबीर नगर संत रविदास नगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस अन्य
Latest news

विज्ञापन

किसानों पर दोहरी मार: बाढ़ में डूबी किसानों की मेहनत, मुआवजे के नाम पर मिले सिर्फ दो-दो हजार रुपए।

By: दीप मिश्रा संपादक

On: Friday, October 23, 2026 8:04 AM

Google News
Follow Us

रिपोर्ट:- शरद मिश्रा
लखीमपुर खीरी: शारदा नदी की बाढ़ ने तराई के किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। खेतों में खड़ी धान और गन्ने की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। कई गांवों में 60 से 70 फीसदी तक फसलें प्रभावित होने का दावा किया जा रहा है। इसके बावजूद फसल मुआवजे के नाम पर किसानों के खातों में महज दो-दो हजार रुपये पहुंचने से उनकी चिंता बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि फसल बर्बाद होने से पहले ही आर्थिक संकट गहरा गया था, अब मुआवजे की रकम से नुकसान की भरपाई करना मुश्किल है। वहीं, कई किसान अब भी सहायता मिलने का इंतजार कर रहे हैं।निघासन क्षेत्र की लुधौरी और बैलहा,बरोठा पंचायतों समेत कई गांव बाढ़ के पानी से प्रभावित हुए थे। पानी भरने से खेतों में खड़ी फसलें डूब गईं। ग्रामीणों के मुताबिक, लुधौरी पंचायत के कई गांवों में करीब 70 फीसदी तक फसलें बर्बादी की कगार पर हैं। खेतों में लंबे समय तक पानी भरा रहने से फसलों को नुकसान लगातार बढ़ रहा है। इसके बावजूद मुआवजे की रकम किसानों को नाकाफी लग रही है।

कुर्सी पर उल्टी अवस्था में लेटे दिखे मुख्य आरक्षी, वीडियो वायरल होने पर निलंबित।

सेमरापुरवा के किसान राजकुमार और नरपे सिंह तथा पुरैना के रामचंद्र,सहजराम, ने बताया कि अभी भी खेतों में पानी भरा हुआ है। गन्ने की फसल नीचे से सड़ रही है, जबकि धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। किसानों का कहना है कि फसल तैयार करने में बीज, खाद, दवा और मजदूरी पर काफी खर्च हुआ था। अब फसल हाथ से निकलने के बाद अगली खेती की तैयारी और परिवार की जरूरतें पूरी करना भी चुनौती बन गया है।
किसानों के मुताबिक, कुछ लोगों के खातों में दो-दो हजार रुपये की सहायता राशि पहुंची है, जबकि बड़ी संख्या में किसान अब भी मुआवजे से वंचित हैं। किसानों का कहना है कि नुकसान का आकलन और मुआवजे की राशि उनकी वास्तविक क्षति के अनुरूप होनी चाहिए, ताकि बाढ़ की मार झेल रहे परिवारों को राहत मिल सके। खेतों में भरे पानी के बीच सड़ती फसलों को देखकर किसान अब नुकसान की भरपाई और अगली फसल की तैयारी को लेकर चिंतित हैं।

लखीमपुर खीरी: मूर्ति विसर्जन के बाद मोल्हेपुरवा में हंगामा, जमीन पर लोटने लगीं युवतियां और महिलाएं; पुलिस ने संभाला मोर्चा।

विज्ञापन

For Feedback - pratibhatimes1@gmail.com

Join WhatsApp

Join Now

Join you tube

Subscribe

Related News

October 23, 2026

October 23, 2026

October 22, 2026

October 22, 2026

October 22, 2026

October 21, 2026

Leave a Comment