लखनऊ। प्रदेश ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद कराए गए विकास कार्यों और उन पर हुए करोड़ों रुपये के भुगतान की व्यापक जांच शुरू कर दी गई है। शासन से प्राप्त निर्देशों के बाद जिला पंचायत राज विभाग ने जांच प्रक्रिया तेज करते हुए संबंधित अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर स्थलीय निरीक्षण और अभिलेखों के सत्यापन के साथ विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए हैं।
जानकारी के अनुसार 27 मई से 7 जुलाई 2026 के बीच 15वें वित्त आयोग एवं पंचम राज्य वित्त आयोग की धनराशि से किए गए भुगतान जांच के दायरे में रहेंगे। जांच के दौरान यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जिन विकास कार्यों पर सरकारी धन खर्च किया गया है, वे वास्तव में धरातल पर मौजूद हैं या नहीं। इसके लिए गांवों में पहुंचकर कार्यों का भौतिक सत्यापन किया जाएगा।
लखीमपुर में गरजे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, संगठन को दिया मजबूती का मंत्र।।
सिर्फ निर्माण कार्यों का निरीक्षण ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति, माप पुस्तिका, भुगतान अभिलेख, बैंक लेनदेन, उपयोगिता प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेजों का भी सूक्ष्म परीक्षण होगा। साथ ही पोर्टल पर अपलोड जियो टैग फोटो और वीडियो का वास्तविक स्थिति से मिलान कर किसी भी प्रकार की विसंगति की जांच की जाएगी।
जांच टीम विशेष रूप से यह भी परखेगी कि कहीं बिना कार्य कराए भुगतान तो नहीं हुआ या फिर अधूरे कार्यों को पूर्ण दर्शाकर सरकारी धन का उपयोग तो नहीं किया गया। एक लाख रुपये से अधिक लागत वाले कार्यों में निर्धारित निविदा प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं, यह भी जांच का अहम हिस्सा रहेगा।
जिला पंचायत राज विभाग ने सभी नामित अधिकारियों को निर्धारित प्रारूप पर रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट में प्रत्येक कार्य की वर्तमान स्थिति, भुगतान की वैधता और यदि कोई अनियमितता मिले तो उसका स्पष्ट विवरण दर्ज किया जाएगा। समस्त रिपोर्ट जिला मुख्यालय के माध्यम से शासन को भेजी जाएगी।
अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में फर्जी भुगतान, कागजी निर्माण, जियो टैगिंग में हेराफेरी, बिना स्वीकृति भुगतान या सरकारी धन के दुरुपयोग जैसे मामले सामने आते हैं तो संबंधित पंचायत सचिव, तकनीकी सहायक, रोजगार सेवक सहित जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के साथ आवश्यक होने पर एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी।
जांच के आदेश जारी होने के बाद ग्राम पंचायतों में हलचल बढ़ गई है। संबंधित कर्मचारी पुराने अभिलेखों को व्यवस्थित करने में जुट गए हैं, जबकि जांच टीमें गांवों में पहुंचकर सत्यापन की तैयारी कर रही हैं। प्रशासन का मानना है कि इस अभियान के बाद विकास कार्यों पर हुए खर्च की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
धान के खेत में 22 फीट का अजगर दिखते ही मचा हड़कंप, वन विभाग ने सुरक्षित किया रेस्क्यू।।











