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आखिर क्या है “कारीकोट मंदिर” की मान्यता और कितना पुराना बताया जाता है मंदिर? आइए जानते है पूरा इतिहास!

By: दीप मिश्रा संपादक

On: Monday, March 16, 2026 1:54 PM

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रिपोर्ट:- शरद मिश्रा
लखनऊ। यूपी के जनपद बहराइच अंतर्गत ब्लॉक मिहीपुरवा में स्थित कारीकोट मंदिर अपने आप में एक अद्भुत आस्था का प्रतीक है। यहां जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से अपनी मनोकामना मांगता है तो वह पूरी जरूर होती है। जिसके चलते यहां हमेशा श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। इस मंदिर की मान्यता है की जो भी यहां हवनकुंड में नारियल चढ़ाता है तो माता रानी उस पर जरूर प्रसन्न होती है और उसकी मन की मुराद पूरी होती है। यहां गर्मियों में गंगा दशहरा पर बहुत बड़ा मेला लगता है। इस मेले में यूपी ही नही अन्य राज्यों से भी दुकानदार आते है। इस मेले में जरूरतों की हर चीज उपलब्ध रहती है तो वही सुरक्षा की दृष्टि से भारी संख्या में पुलिस बल भी मौजूद रहता है।

इस मंदिर के महंत विनोद मिश्रा ने इस मंदिर के इतिहास के बारे में बताते हुए मंदिर परिसर के लगे पाकड़ के पेड़ को 800 वर्ष पुराना बताया और उनका कहना है की इसी पेड़ में काली माता का वास है।
लगभग 800 वर्ष पहले राजा करिंगा जब जंगल से शिकार करके वापस आए तो उनके साथ माता रानी भी वृद्ध के वेश में चली आई और जब राजा करिंगा अपने महल पहुंचे तो पीछे मुड़कर देखा तो माता रानी गायब थी। इससे उन्हें आश्चर्य हुआ और वह सोच में पड़ गए कि आखिर वृद्ध महिला कहा गई। जिसके बाद वह जब रात्रि विश्राम में आए तो उन्हें स्वप्न में माता रानी ने दर्शन दिए और उन्हें बताया कि वह वृद्ध महिला वही थी और महल से कुछ ही दूर पर वह एक पाकड़ के पेड़ में समाहित हो गई है। साथ ही उन्हें अभय वरदान दिया कि जब कोई भक्त सच्ची श्रद्धा व भाव से यहां आकर माथा टेकेगा तो तो हर मनोकामना पूर्ण होगी। तब से लेकर आज तक भी वह पाकड़ का पेड़ मौजूद है और भारी संख्या में भक्त कारीकोट मंदिर पहुंचकर अपनी मुरादें मांगते है और उनकी मन्नतें पूरी भी होती है।

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