रिपोर्ट:- शरद मिश्रा
लखीमपुर खीरी। जिले के धौरहरा वन क्षेत्र में तेंदुए के हमले की एक दर्दनाक घटना से बोझिया गांव में दहशत फैल गई। सोमवार रात घर के आंगन में खेल रही सात वर्षीय बच्ची सानिया को तेंदुआ उठा ले गया। बेटी की चीख सुनकर पिता ने जान की परवाह किए बिना तेंदुए का पीछा किया, लेकिन वह बच्ची को लेकर गन्ने के खेतों में ओझल हो गया। देर रात तक तलाश के बावजूद बच्ची का कोई सुराग नहीं मिला। खेत में उसके कपड़े मिलने से परिवार की चिंता और बढ़ गई।
जानकारी के मुताबिक, बोझिया गांव निवासी संपत गिरी खेती-किसानी करते हैं। सोमवार शाम वह बाजार से अपनी बेटी के लिए केला लेकर घर लौटे थे। रात करीब आठ बजे सानिया घर के आंगन में खेल रही थी, जबकि उसका जुड़वां भाई विकास घर के अंदर था। इसी दौरान तेंदुआ अचानक आंगन में पहुंचा और बच्ची को जबड़े में दबाकर ले जाने लगा।

बेटी की आवाज सुनते ही संपत गिरी तेंदुए के पीछे दौड़ पड़े। उन्होंने करीब 200 मीटर तक उसका पीछा किया, लेकिन जंगली जानवर गन्ने के खेत में घुस गया। पिता के शोर मचाने पर परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे। इसके बाद गांव वालों ने आसपास के खेतों में बच्ची की तलाश शुरू कर दी।

गन्ने के खेत में मिले कपड़े, बच्ची की तलाश जारी
घटना की सूचना पर पढ़ुआ थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस और ग्रामीणों ने गन्ने के खेतों सहित आसपास के इलाकों में तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान खेत में बच्ची के कपड़े मिले, लेकिन सानिया का पता नहीं चल सका। थानाध्यक्ष मोहित पुंडीर के अनुसार, बच्ची की तलाश की जा रही है।
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वन विभाग की देरी पर ग्रामीणों में नाराजगी
ग्रामीणों का आरोप है कि घटना के करीब चार घंटे बाद तक वन विभाग की टीम मौके पर नहीं पहुंची थी। इससे लोगों में नाराजगी देखी गई। गांव में तेंदुए की मौजूदगी और मासूम बच्ची के लापता होने की घटना से दहशत का माहौल है। ग्रामीण देर रात तक बच्ची को खोजने में जुटे रहे।
बोझिया गांव में हुई इस घटना के बाद परिवार की निगाहें बच्ची की तलाश पर टिकी हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि सानिया का जल्द पता चलेगा और वन विभाग तेंदुए की गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाएगा।


















