रिपोर्ट:- दीप शंकर मिश्र “दीप”
लखनऊ। आज के इस दौर में जहां आईएएस अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे तो वहीं कुछ अधिकारी ऐसे भी है जो अपनी सच्ची लगन निष्ठा व कर्तव्य को निभाते हुए स्वच्छ छवि की नौकरी कर रहे है। हम बात कर रहे वरिष्ठ आईपीएस सुभाष चन्द्र दुबे की जिन्होंने अपने गांव से पढ़ाई करने के बाद इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया और पढ़ाई जारी रखी साथ ही इन्होंने सिविल सर्विस की तैयारी करनी भी शुरू कर दी। इन्होंने कभी पढ़ाई के लिए कभी कोचिंग का सहारा नही लिया और यूपीएससी में 74वीं रैंक हासिल कर पूरे इलाहाबाद में काफी चर्चित हुए।
2005 बैच के आईपीएस अधिकारी सुभाष चंद्र दुबे उत्तरप्रदेश के जनपद सुल्तानपुर के रहने वाले है। इनके पिता का नाम राजनाथ दुबे है। इन्होंने इतिहास से एमए, यूजीसी जेआरएफ/नेट, बीएड, पीजीडीडीएम, एमडीपीएम के साथ हिंदी से एमए, समाजशास्त्र से एमए व राजनीति विज्ञान से एमए कर गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुके है।
प्रशासन में एक नया अध्याय, तीन महिला अफसरों के नेतृत्व में यूपी का सबसे बड़ा जिला।।
आईपीएस सुभाष दुबे सोनभद्र, गाजीपुर और भदोही आदि जिलों के कप्तान व आजमगढ़ रेंज डीआईजी, वाराणसी कमिश्नरेट के अपर पुलिस आयुक्त भी रह चुके है। इन दिनों इनकी तैनाती पुलिस महानिरीक्षक यातायात लखनऊ के रूप में है। इनकी गिनती तेजतर्रार एवम अत्यंत कर्तव्यनिष्ठ वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों में की जाती है। इनकी तैनाती जहां भी होती है वहां जुर्म की दुनिया हलचल मची रहती है। इनका अपराधियों से साफ तौर पर कहना है या तो अपराध छोड़ दो या फिर कार्यवाही के लिए तैयार रहो। यही वजह है की उच्चाधिकारी भी आईपीएस सुभाष चंद्र दुबे की जमकर सराहना करते है। इन्होंने सोनभद्र में तैनाती के दौरान नक्सलवादियों पर शिकंजा कसा तो आजमगढ़ में बाहुबली गैंगस्टर पर नकेल कस कार्यवाही की थी। ये समय समय पर सोशल मीडिया पर भी सक्रिय रहकर समाज को प्रेरणा देते है। जिसकी वजह से सोशल मीडिया के हर प्लेटफार्म पर इनके लाखों में चाहने वाले है।
इन विधायकों के बारे में जानकर आप भी चौक जाएंगे की आखिर क्या है असली माजरा।
























