रिपोर्ट:- शरद मिश्रा
निघासन खीरी। दो दिनों से लगातार हो रही बारिश और शारदा नदी के बढ़ते जलस्तर ने निघासन क्षेत्र के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। शारदा नदी के उफान से क्षेत्र के कई गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं, जबकि खेतों में खड़ी फसलें पानी में डूबने से किसानों को भारी नुकसान की आशंका है। सोमवार को झंडी-निघासन मार्ग पर भी पानी चलने लगा, जिससे आवागमन प्रभावित होने लगा है।
बाढ़ का पानी पुरैना, रानीगंज, ठाकुरपुरवा, गौढ़ीपुरवा, चंदनपुरवा, झंडी, बरोठा, बैलहा डीह, कुर्मीनपुरवा, टॉपरपुरवा, लोनियनपुरवा, लांघनियापुरवा समेत दर्जनों गांवों तक पहुंच गया है। खेतों में पानी भरने से धान, गन्ना और केला समेत अन्य फसलों पर संकट खड़ा हो गया है। किसानों का कहना है कि यदि पानी जल्द नहीं उतरा तो तैयार खड़ी फसलों को भारी नुकसान हो सकता है।
किसानों के मुताबिक खेती ही उनकी आजीविका का मुख्य आधार है। ऐसे में एक बार फसल बर्बाद होने पर परिवार के रोजमर्रा के खर्च से लेकर कर्ज की अदायगी तक प्रभावित हो जाती है। इस बार लगातार बारिश के कारण खेतों में अत्यधिक नमी हो जाने से आगामी फसलों की बुवाई भी प्रभावित होने की आशंका है।
क्या कहते हैं किसान
किसान अरुण शुक्ला (सोनू) का कहना है कि इस बार बारिश ने धान, गन्ना और केला समेत कई फसलों को प्रभावित किया है। बोई जाने वाली फसलों की बुवाई में भी देरी होगी। खेतों में अधिक नमी के कारण फसल समय से तैयार नहीं हो पाएगी। उन्होंने सरकार से फसल नुकसान का सर्वे कराकर किसानों को उचित आर्थिक मुआवजा देने की मांग की, ताकि उन्हें कुछ राहत मिल सके।
वहीं किसान शहनूर अली ने बताया कि भारी बारिश ने पकने के कगार पर पहुंच चुकी फसलों को नुकसान पहुंचाया है। कुछ ही दिनों में धान की फसल कटने वाली थी और उम्मीद थी कि फसल बेचकर कर्ज चुकाया जाएगा, लेकिन बारिश और बाढ़ ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। उन्होंने कहा कि कई परिवारों के सामने शादी-विवाह और अन्य जरूरी खर्च भी हैं। अब किसानों को सरकार से ही उम्मीद है कि फसल नुकसान का आकलन कर उन्हें कितना मुआवजा मिलता है।
लगातार बारिश और शारदा नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच किसानों की निगाहें अब प्रशासन और सरकार की ओर टिकी हैं। किसानों ने जल्द सर्वे कराकर नुकसान का आकलन और उचित मुआवजा दिलाए जाने की मांग की है।
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