रिपोर्ट:- शरद मिश्रा
निघासन खीरी। मोहाना नदी ने एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। जसनगर व नया पिंड में नदी के तेज कटान ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। देखते ही देखते कटान शिवभगवान, रामकुमार और गोवर्धन के घरों तक पहुंच गया, जिससे इन परिवारों पर आशियाना उजड़ने का खतरा मंडराने लगा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि कटान रोकने के नाम पर करोड़ों रुपये की परियोजनाओं के बावजूद मोहाना नदी के आगे सरकारी इंतजाम बेबस क्यों नजर आ रहे हैं? ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस इंतजाम नहीं किए गए तो कई मकान नदी की जद में आ सकते हैं।
कटान की विकराल स्थिति को देखते हुए बुधवार को एसडीएम निघासन यदुवीर सिंह और नहर विभाग के अधिशासी अभियंता मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लिया और मकानों को कटान से बचाने के लिए नदी किनारे पत्थरों का जाल लगवाया गया है। फिलहाल यह कवायद नदी के बढ़ते कटान को रोकने और प्रभावित मकानों को सुरक्षित रखने के लिए की जा रही है।
करोड़ों की परियोजना पर उठे सवाल
मोहाना नदी के कटान से बार-बार तबाही का खतरा पैदा होने के बीच अब सरकारी परियोजनाओं की उपयोगिता पर सवाल उठने लगे हैं। यदि करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी नदी का कटान ग्रामीणों के घरों की चौखट तक पहुंच रहा है, तो आखिर इन परियोजनाओं का धरातल पर कितना असर हुआ?
ग्रामीणों का सीधा सवाल है कि जब कटान रोकने की व्यवस्था कारगर नहीं थी तो करोड़ों रुपये की परियोजना को नदी की धारा में बहाने का क्या फायदा हुआ?
अब देखना होगा कि पत्थरों के जाल से मोहाना नदी का विकराल कटान थमता है या फिर ग्रामीणों को अपने आशियाने बचाने के लिए एक और बड़ी तबाही का इंतजार करना पड़ेगा।
कार सवारों को डूबता देख फरिश्ते बनकर खाई में कूदे पांच दोस्त, बचाई पांच जिंदगियां।











