रिपोर्ट:- शरद मिश्रा
लखीमपुर खीरी। भीरा वन रेंज के सेमरिया गांव में पर्यावरण के सफाईकर्मी कहे जाने वाले पक्षी गिद्धराज की मौत को लेकर जांच तेज हो गई है। अचानक 25 गिद्धों की मौत से जहां पर्यावरण को खतरा है तो वहीं वनविभाग के लिए भी चिंता का सबब है। आसमान में चक्कर लगाने वाले गिद्ध इस बार जमीन पर निढाल पड़े थे वह भी एक-दो नहीं, बल्कि पूरे 25। इस सामूहिक मौत ने न केवल गांव बल्कि वन विभाग तक में हलचल मचा दी है।
घटनाकी सूचना मिलते ही शासन हरकत में आया और तत्काल जांच के आदेश जारी किए गए। लखनऊ से मुख्य वन संरक्षक संजय कुमार पाठक टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने डीएफओ खीरी कीर्ति चौधरी के साथ घटनास्थल का गहन निरीक्षण किया और हर छोटे-बड़े साक्ष्य को गंभीरता से परखा।
अधिकारियों ने मृत गिद्धों के मिलने वाले स्थान, आसपास के हालात और ग्रामीणों की बातों को जोड़कर घटना की कड़ियां समझने की कोशिश की। स्थानीय लोगों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से गिद्धों की गतिविधियां सामान्य थीं, लेकिन अचानक इतनी बड़ी संख्या में उनका मृत मिलना किसी अनहोनी की ओर इशारा करता है।
मुख्य वन संरक्षक संजय पाठक ने बताया कि किसी कुत्ते ने जहर खाया होगा जिससे उसकी मौत हो गई और उसी मृत जानवर को खाकर गिद्धों की मौत हुई या फिर खेतों में उपयोग होने वाले कीटनाशकों से प्रभावित किसी मृत पशु को खाने के कारण गिद्ध जहर की चपेट में आ गए होंगे। यदि यह आशंका सही साबित होती है, तो यह मामला केवल वन्यजीवों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मानव गतिविधियों के खतरनाक असर को भी उजागर करेगा।
मुख्य वन संरक्षक ने इस घटना को “प्रकृति के संतुलन के लिए खतरे की घंटी” बताया। उन्होंने साफ कहा कि गिद्ध केवल पक्षी नहीं, बल्कि पर्यावरण के सफाईकर्मी हैं—इनकी कमी सीधे तौर पर बीमारियों और प्रदूषण के खतरे को बढ़ा सकती है।
सख्त रुख अपनाते हुए अधिकारियों ने जिले में कीटनाशकों और उर्वरकों की बिक्री पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। अब हर खरीदार का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य किया जाएगा, ताकि यह पता चल सके कि रसायनों का उपयोग किस उद्देश्य से हो रहा है।
फिलहाल, पोस्टमार्टम और बिसरा रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जो इस रहस्यमयी घटना की असली वजह उजागर करेगी।





























