रिपोर्ट:- शरद मिश्रा
निघासन खीरी। उच्च प्राथमिक विद्यालय कोलापुरवा में एमडीएम और कंपोजिट ग्रांट की मदों में गंभीर अनियमितताओं का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पूर्व प्रधानाध्यापिका नेहा ने तत्कालीन इंचार्ज शिक्षक पारसनाथ शुक्ला पर धन के गबन, खाद्यान्न की हेराफेरी और मानसिक उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
पूर्व प्रधानाध्यापिका ने 15 अक्टूबर 2025 को बीएसए को दिए शिकायती पत्र में बताया था कि एमडीएम रजिस्टर और बैंक पासबुक के मिलान में 32,125 रुपये की अतिरिक्त धनराशि का अंतर पाया गया, जिसका कोई स्पष्ट विवरण उपलब्ध नहीं था। इसके अलावा खाद्यान्न रजिस्टर में 20.29 कुंतल चावल और 6.98 कुंतल गेहूं का अंतर भी सामने आया, जिसे चार्ज के दौरान प्राप्त नहीं कराया गया।
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मामले को गंभीरता से लेते हुए बीएसए प्रवीण कुमार तिवारी ने 21 अक्टूबर 2025 को नोटिस जारी कर खंड शिक्षा अधिकारी सहित दोनों शिक्षकों को तलब किया था। इस दौरान खंड शिक्षा अधिकारी और इंचार्ज प्रधानाध्यापिका उपस्थित हुईं, जबकि आरोपित शिक्षक पारसनाथ शुक्ला पेश नहीं हुए। इसके बाद 21 नवंबर और 23 दिसंबर 2025 को अंतिम अवसर देते हुए पुनः नोटिस जारी किए गए, लेकिन वह फिर भी उपस्थित नहीं हुए।
बताया जा रहा है कि बीएसए के निर्देश पर खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा तीन बार जांच की गई, जिसमें पारसनाथ शुक्ला को दोषी पाया गया। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। मामला जब जिलाधिकारी तक पहुंचा तो आरोप है कि तीन बार आख्या मांगे जाने के बावजूद बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
हैरानी की बात यह है कि जहां एक ओर जांच में दोषी पाए गए शिक्षक पर कार्रवाई लंबित है, वहीं दूसरी ओर शिकायतकर्ता को ही विभाग द्वारा नोटिस जारी कर दिया गया है। इससे पूरे प्रकरण पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अब देखना होगा कि विभाग जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपित शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई करता है या मामला यूं ही ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।





























