तेंदुओं के साए में जी रहे ग्रामीण, हर कदम पर मंडरा रहा मौत का खतरा।
रिपोर्ट:- शरद मिश्रा
लखीमपुर खीरी। जनपद की तहसील निघासन, पलिया और धौरहरा क्षेत्रों में इन दिनों तेंदुओं की बढ़ती चहलकदमी ने ग्रामीणों की जिंदगी में भय का माहौल पैदा कर दिया है। हालात ऐसे हो चले हैं कि तेंदुए का दिखना अब कोई असामान्य घटना नहीं रह गई, बल्कि यह आम बात बनती जा रही है।
जंगलों से निकलकर आबादी और खेतों की ओर बढ़ रहे तेंदुए ग्रामीणों के लिए गंभीर खतरा बन गए हैं। किसान, जो कभी बिना किसी डर के अपने खेतों में काम करते थे, अब हर कदम फूंक-फूंक कर रखने को मजबूर हैं। खेतों में काम के दौरान जंगली जानवरों के हमलों की आशंका ने उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को भयभीत कर दिया है।
बीते दिनों मझगई वन क्षेत्र में तेंदुए ने तीन किसानों पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया। हालांकि, किसानों ने साहस दिखाते हुए तेंदुए से संघर्ष किया और उसे रस्सी से बांधने में कामयाब रहे, लेकिन इस घटना ने इलाके में दहशत को और बढ़ा दिया।
वहीं, बेलरायां वन क्षेत्र के फुटहा फार्म में हुई दर्दनाक घटना ने पूरे जनपद को झकझोर कर रख दिया, जहां एक सात वर्षीय मासूम बच्ची को तेंदुआ घर के भीतर से उठाकर ले गया। इस हृदयविदारक घटना के बाद ग्रामीणों में भय और आक्रोश दोनों व्याप्त हैं।
लगातार अलग-अलग स्थानों पर तेंदुओं के देखे जाने की घटनाएं यह संकेत दे रही हैं कि क्षेत्र में कई तेंदुए सक्रिय हैं। इसके बावजूद वन विभाग इन पर नियंत्रण पाने में असहाय नजर आ रहा है, जिससे ग्रामीणों का भरोसा भी कमजोर पड़ता जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो हालात और भी भयावह हो सकते हैं। फिलहाल, गांवों में शाम ढलते ही सन्नाटा पसर जाता है और लोग अपने घरों में दुबकने को मजबूर हैं।
तेंदुए ने दो ग्रामीणों पर किया हमला तो ग्रामीणों ने तेंदुए को जिंदा पकड़कर बांधा।





























