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Rewa Mp: मातम में बदली ईद की खुशियां, भीषण सड़क हादसे में चार युवाओं की दर्दनाक मौत।

By: admin

On: Monday, March 31, 2025 7:51 PM

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माटम में बदली ईद की खुशियां, भीषण सड़क हादसे में चार बच्चों की मौत।

देखिए वीडयो👇👇

ईद की ख़ुशियाँ मातम में बिखर हो गए, जब चार बच्चों की जिंदगियाँ सड़क हादसे में बर्बाद हो गईं। गुढ़ थाना क्षेत्र के चूडियार में हुए इस भीषण हादसे ने रेलवे स्टेशन को सिसकियों में बदल दिया। तेज धार वाली, स्थिर और स्थिर के कोरियोग्राफी हिट ने चार घरों के चिराग भाई को नीचे गिरा दिया। सोमवार की दोपहर, जब पूरा शहर ईद की खुशियों में सराबोर था, तभी चौधरी मोड़ से एक ऐसी माँ उठी जिसने सबको झकझोर कर रख दिया। पोखरी कॉलोनी निवासी सत्यम साकेत, मोहम्मद जुम्मन, मोहम्मद अफरीद मंसूरी और कितवारिया निवासी मोहम्मद शादाब, चारों दोस्त एक ही बाइक पर सवार होकर मोहनिया टनल की यात्रा पर निकले थे। मगर किसे पता चला कि यह उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा।

अंतिम वक्ता स्टूडियो मोड़ पर उनकी बाइक अनियंत्रित हो गई और निरीक्षण में विपरीत दिशा से भारी वाहन हाईवे से सीधी टक्कर हो गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक के पर्चे उड़ गए और चार कारों ने कार पर ही दम तोड़ दिया। सड़क पर बकरियां और मृत बाइक का मंज़र इतना सरल था कि साधन का रूह कांप निकला।

स्थानीय स्थानीय और प्लांट ने तुरंत पुलिस को सूचित किया। म्युज़िक पर परमाणु गुढ़ा थाना पुलिस ने संजय गांधी अस्पताल में मस्जिद को बंद कर दिया और मामले की जांच शुरू कर दी है। अस्पताल में अस्पताल की चीख-पुकार दिल को छलनी कर रही थी। खुशियों से घर और मातम पसरा हुआ है, जहां ईद की दावत की अलख जगाती है, वहां अब फूलों वाली सिसकियों का साया है। फ़ास्ट व्युत्पत्ति, विविधता और विविधता पर रेसती यूनिवर्सल, यह कोई पहली दुर्घटना नहीं है, लेकिन हर दुर्घटना के बाद एक ही सवाल है। ऐसी मर्करी को कैसे खरीदा जा सकता है? हमारे युवा सुरक्षित सड़क पर क्या चलेंगे? शायद यह सिर्फ एक हादसा नहीं है, बल्कि हमारे समाज के लिए एक कड़ी चेतावनी है।

इनका कहना है…
डॉ. यत्नेश त्रिपल, प्रवक्ता, संजय गांधी अस्पताल।
जब चौबारे को अस्पताल लाया गया, तब तक उनकी सांसें थमाथली थीं। सिर और शरीर पर गहरी तलवारों के कारण मक्के पर ही उनकी मृत्यु हो गई थी।

मृतकों के शवगृह।
बेटे की खुशियां सलाम निकली थीं, लेकिन अब उसे कंधे पर ले जाना पड़ रहा है। यह कैसा समय आया, हमारा चिराग बुज़ कहाँ गया?

 

 

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