रिपोर्ट:- शरद मिश्रा
निघासन (लखीमपुर खीरी)। जिस बेटे को मेहनत-मजदूरी कर परिवार का सहारा बनना था, आज उसी बेटे की तलाश में एक मां की आंखें पथरा रही हैं। हर बीतते दिन के साथ उसकी बेचैनी बढ़ती जा रही है। घर के दरवाजे पर होने वाली हर आहट और रास्ते से गुजरने वाले हर शख्स में उसे अपने बेटे की झलक दिखाई देती है। लेकिन एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी बेटे की कोई खबर नहीं है। यह दर्द है जनपद लखीमपुर खीरी के निघासन थाना क्षेत्र के झंडी गांव निवासी फूलकुमारी का, जिनका बेटा प्रमोद मेरठ में मजदूरी करने गया था और वहीं से लापता हो गया।
परिवार के अनुसार, प्रमोद करीब एक माह पहले दिहाड़ी मजदूरी करने के लिए जनपद मेरठ गया था। उसके साथ ठेकेदार समेत गांव के कुछ अन्य लोग भी मौजूद थे। परिजनों को उम्मीद थी कि मेहनत-मजदूरी कर प्रमोद परिवार की जिम्मेदारियों में हाथ बंटाएगा, लेकिन कुछ ही समय बाद उसके लापता होने की खबर ने पूरे परिवार को चिंता में डाल दिया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर प्रमोद कहां गया और उसके साथ ऐसा क्या हुआ कि उसका कोई पता नहीं चल पा रहा है?
परिवार का कहना है कि प्रमोद के साथ गए ठेकेदार और अन्य लोगों से भी उसके बारे में जानकारी लेने की कोशिश की गई, लेकिन उनके अनुसार उन्हें प्रमोद के बारे में कुछ पता नहीं है। ऐसे में परिवार की बेचैनी लगातार बढ़ती जा रही है। अपनों से दूर अनजान शहर में लापता हुए प्रमोद की तलाश अब परिजनों के लिए किसी कठिन परीक्षा से कम नहीं है।
लखीमपुर खीरी में ओम बिरला, केशव मौर्य और स्वतंत्र देव सिंह की मौजूदगी में हुआ भव्य आयोजन।
बेटे की राह ताक रही मां, हर दिन भारी
प्रमोद की मां फूलकुमारी का दर्द शब्दों में बयां करना आसान नहीं है। जिस बेटे को उन्होंने बचपन से पाल-पोसकर बड़ा किया, आज उसी की एक झलक पाने के लिए वह दर-दर भटकने को मजबूर हैं। बेटे की सलामती की उम्मीद में वह इधर-उधर चक्कर काट रही हैं। परिवार के लिए हर दिन एक नई चिंता और हर रात अनगिनत सवाल लेकर आ रही है। आखिर उनका बेटा कहां है? किस हाल में है? क्या वह सुरक्षित है? इन सवालों का जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है।
पुलिस में दर्ज है गुमशुदगी, तलाश जारी
प्रमोद के लापता होने के बाद उसके भाई ने जनपद मेरठ के थाना परीक्षितगढ़ में गुमशुदगी दर्ज कराई है। पुलिस के अनुसार, प्रमोद की तलाश की जा रही है, लेकिन अभी तक उसके संबंध में कोई सुराग नहीं मिल सका है। एक महीने से अधिक समय बीतने के बावजूद उसका पता न चलना परिवार की चिंता को और बढ़ा रहा है।
फिलहाल फूलकुमारी और उनके परिवार की निगाहें इस उम्मीद पर टिकी हैं कि कहीं से प्रमोद की कोई खबर मिल जाए और उनके घर का सूना पड़ा आंगन फिर से खुशियों से भर उठे। परिवार को अब भी अपने बेटे के सकुशल लौटने का इंतजार है। जरूरत है कि प्रमोद की तलाश में गंभीरता से प्रयास किए जाएं, ताकि एक मां को उसके बेटे की खबर मिल सके और परिवार की अनिश्चितता समाप्त हो सके।

















