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गरीबी की मार और आर्थिक तंगी की वजह से मजबूर पिता, दो बेटों को खोने का गम और फिर बीमारी का दस्तक।।

By: दीप मिश्रा संपादक

On: Tuesday, January 20, 2026 11:11 AM

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रिपोर्ट:- शरद मिश्रा
लखीमपुर खीरी। तहसील निघासन अंतर्गत मटेहिया गांव का रहने वाला लक्ष्मण इन दिनों जिंदगी की सबसे कठिन परीक्षा से गुजर रहा है। अत्यंत गरीब लक्ष्मण पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूटा है, जिससे उबर पाना उसके लिए आसान नहीं है।
बीमारी के चलते लक्ष्मण अपने दो बेटों को पहले ही खो चुका है। परिवार में अब उसकी पत्नी और बच्चे हैं। दुर्भाग्य यह है कि लक्ष्मण की पत्नी एक हाथ से विकलांग है, बावजूद इसके वह अपने पति के साथ घर के कामों में यथासंभव सहयोग करती है। परिवार की पूरी जिम्मेदारी लक्ष्मण के कंधों पर है, जो इधर-उधर मजदूरी कर किसी तरह घर का खर्च चलाता है।
परिवार पर संकट यहीं खत्म नहीं होता। लक्ष्मण का एक और बेटा भी गंभीर बीमारी से जूझ रहा है। चिकित्सकों के अनुसार बच्चे का गुर्दा खराब है, जिसके चलते उसके पेट में लगातार दर्द और शरीर में सूजन बनी रहती है। आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर होने के बावजूद लक्ष्मण अपने बेटे के इलाज में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है।

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फिलहाल लक्ष्मण अपने बीमार बेटे का इलाज निघासन के सरकारी अस्पताल में करा रहा है। हालांकि सीमित संसाधनों के बीच इलाज कराना उसके लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। मजबूरी में सरकारी अस्पताल ही इस परिवार के लिए आखिरी उम्मीद बना है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन और समाज की ओर से समय रहते मदद मिल जाए, तो शायद इस परिवार को कुछ राहत मिल सके। यह मामला न केवल सरकारी योजनाओं की जरूरत को दर्शाता है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं को भी झकझोरता है।
इससे पहले तहसील पलिया क्षेत्र में तैनात डॉक्टर मनोज वर्मा ने इस परिवार की काफी मदद की है। उन्होंने पूर्व में बीमार बच्चे को जिला अस्पताल में भर्ती करवाया था और इलाज से लगाकर अन्य खर्चों में परिवार की मदद की थी। पेड़ से लकड़ी काटने के दौरान एक बार लक्ष्मण गिर पड़ा था जिससे उसके दोनों हाथ टूट गए थे तब भी डॉक्टर मनोज वर्मा ने अपने निजी खर्च से संवेदना व्यक्त करते हुए गरीब लक्ष्मण के दोनों हाथों का इलाज कराया था।

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