रिपोर्ट:- शरद मिश्रा
निघासन खीरी। तहसील निघासन अंतर्गत गाँव गुलरीपुरवा में स्थित माँ राज राजेश्वरी दुर्गा मंदिर क्षेत्र में सच्चे स्थान के रूप में माना जाता है।
इस मंदिर में नवरात्रि के दिनों श्रद्धालुओं की भारी भींड़ जमा होती है। महीने की हर 11 तारीख को इस मंदिर में मेला लगता है व इस मंदिर प्रांगण में बना क्षीर सागर जिसमें बीचों बीच शेषनाग पर विराजमान भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की विशालकाय मूर्ति लोगों के श्रद्धा व आकर्षण का केंद्र बनती है। यह मंदिर निघासन नगर से लगभग 12 किलोमीटर दूर स्थित है। इस मंदिर में दूर दराज से लोग माँ दुर्गे का आशीर्वाद लेने आया करते है।
ऐसे पहुँचे मंदिर तक:-
माँ राजराजेश्वरी दुर्गा मंदिर निघासन तहसील मुख्यालय से लगभग 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
यहाँ तांगा, ऑटो व बस से पहुँचा जा सकता है।
झंडी गाँव से लगभग 5 किलोमीटर दूरी पर स्थित है।

विशेषता:-
- महीने की हर 11 तारीख को मेला लगता है।
- मंदिर परिसर में क्षीर सागर बना है जिसमें शेषनाग पर विरजमान भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की विशालकाय मूर्ति है।
- मंदिर परिसर में रथ के साथ दौड़ते हुए छोड़ों की विशालकाय मूर्ति बनी है।
- नवरात्रि के दिनों में श्रद्धालुओं की अपार भींड़ लगी रहती है।
- मंदिर परिसर में रुद्राक्ष का वृक्ष भी लगा है।

इतिहास:-
निघासन क्षेत्र में माँ राजराजेश्वरी दुर्गा मंदिर भक्तों का केंद्र बना जाता है। यहाँ पर सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूर्ण होती है।
भजन गायक विनीत पांडेय व आसपास के लोगों से मिली जानकारी के अनुसार लगभग 35 वर्ष पूर्व इस जगह पर छोटा सा मंदिर था जिसमे माँ दुर्गे की मूर्ति स्थापित थी। धीरे-धीरे इससे लोगों की आस्था जुड़ती गयी और लोगों के सहयोग से इस मंदिर भव्य निर्माण कराया गया।
इस मंदिर परिसर में बहुत ही दुर्लभ प्रजाति का पेड़ लगा है जिसे हम रुद्राक्ष कहते है जो प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं को दिया जाता है।
महीने की हर 11 तारीख को माता रानी का जन्मदिन मनाया जाता है व हर महीने की 11 तारीख को मेला लगता है। हर वर्ष वार्षिक उत्सव के रूप में
7 जून से 11 जून तक सतचंडी महायज्ञ का आयोजन होता है।
माँ राज राजेश्वरी दुर्गा माता मंदिर क्षेत्रवासियों के लिए वरदान है। में उसी गाँव का रहना वाला हूँ व इस मंदिर से हमारी बहुत आस्था जुड़ी हुई है। में सुबह-शाम दर्शन करने आता हूँ और माँ की भक्ति में इतना लीन हूँ कि नवरात्रि में होने वाले माँ के जगराते कार्यक्रम में भजन गाकर लोगों को भक्ति में लीन करने की कोशिश करता हूँ।
आज में अपने जनपद ही बल्कि पूरे प्रदेश में दूर-दूर तक बुलाया जाता हूँ और अपनी आवाज से माता रानी के जगराते में भजन गाकर लोगों को माँ को भक्ति में लीन करने की कोशिश करता हूँ:- विनीत पांडेय, भजन गायक
माँ राजराजेश्वरी दुर्गा मंदिर गुलरीपुरवा को लगभग 35 वर्ष हो गए। यह माता रानी का सच्चा स्थान है व सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना यहाँ पूर्ण होती है।
माँ दुर्गे की 35 वर्ष पूर्व मंदिर निर्माण समय की मूर्ति आज भी मंदिर में शोभायमान है। यहाँ दुर्लभ प्रजाति का वृक्ष रुद्राक्ष लगा है जिसे श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में दिया जाता है:- रामस्नेही, पुरोहित



















