रिपोर्ट:- शरद मिश्रा
लखीमपुर खीरी। मनरेगा कर्मियों ने विगत कई महीनों से मानदेय और ईपीएफ का भुगतान न होने पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। ग्राम रोजगार सेवक, कम्प्यूटर ऑपरेटर, तकनीकी सहायक तथा अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारियों ने प्रशासन को पत्र भेजकर बताया कि जुलाई 2025 से उनका मानदेय लंबित है, जिससे उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने विभागीय निर्देशों के अनुसार मनरेगा के लक्ष्यों की पूर्ति के साथ-साथ एसआईआर, क्रॉप सर्वे सहित अन्य सरकारी कार्यों में भी पूरी जिम्मेदारी निभाई है। इसके बावजूद विभागीय शिथिलता के कारण उन्हें कई महीनों से वेतन नहीं मिला है और ईपीएफ की देयता भी लंबित है। कर्मचारियों ने बताया कि दीपावली और अब होली जैसे बड़े त्योहार भी बिना वेतन के गुजर गए, जिससे उनके परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है।
पार्टी के प्रति समर्पण की मिसाल हैं वरिष्ठ भाजपा नेता शरद बाजपेई।।
मनरेगा कर्मियों ने कहा कि लंबे समय से मानदेय न मिलने और कार्य के नाम पर हो रहे उत्पीड़न से वे बेहद आहत हैं। उन्होंने इस स्थिति को संविधान के अनुच्छेद 21 में वर्णित “जीवन के अधिकार” के विपरीत बताया है।
संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने 23 फरवरी 2026 को ग्राम्य विकास विभाग के आयुक्त एवं रोजगार गारंटी आयुक्त से मिलकर स्थिति से अवगत कराया था। कर्मचारियों का कहना है कि यूपी में सर्वाधिक मानव दिवस सृजित होने के बावजूद प्रशासनिक मद उपलब्ध होने के बाद भी कर्मचारियों को मानदेय और ईपीएफ का भुगतान न होना गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
सोमवार को ब्लॉक निघासन में मनरेगाकर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर डीएम, सीडीओ व उपयुक्त श्रम व रोजगार को संबोधित ज्ञापन बीडीओ निघासन जयेश कुमार सिंह को सौंपा है।
इस दौरान रोजगार संघ निघासन के ब्लॉक अध्यक्ष अमर प्रकाश शुक्ला, संजय गुप्ता, आशीष कन्नौजिया, तिलकराम यादव, अनिल कुमार, कैलाश कुमार, मोहम्मद याकूब, दुर्गेश कुमार, रामबहादुर, श्रीराम, नीरज, विनोद, अवधेश, मोहम्मद रफीक, मैथिली शरण आदि लोग मौजूद रहे।
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