रिपोर्ट:- शरद मिश्रा
लखीमपुर खीरी: विकासखंड निघासन अंतर्गत ग्राम पंचायत मोतीपुर इन दिनों एक अनोखी वजह से चर्चा में है। यहां के प्रधान प्रतिनिधि पटेल कुलदीप सिंह उर्फ केडी ने न सिर्फ गौवंश संरक्षण की मिसाल पेश की है, बल्कि इंसान और पशु के बीच प्रेम का ऐसा रिश्ता कायम किया है, जिसे देखकर हर कोई भावुक हो उठता है।
सन 2023 में कुलदीप सिंह ने गांव में बढ़ती छुट्टा गौवंश की समस्या और किसानों की फसलों को हो रहे नुकसान को देखते हुए एक बड़ा निर्णय लिया। उन्होंने अपनी 10 बीघा निजी जमीन निःशुल्क रूप से गौशाला के लिए दे दी। शर्त केवल इतनी रखी कि जब तक गौशाला संचालित होगी, जमीन उसी के नाम रहेगी; भविष्य में यदि गौशाला हटती है तो जमीन उन्हें वापस मिल जाएगी।
करीब पांच हजार की आबादी और लगभग 3200 मतदाताओं वाले इस गांव में गौवंश की संख्या अधिक होने से किसान लंबे समय से परेशान थे। ऐसे में कुलदीप की पहल ने गांव को बड़ी राहत दी। 21 जनवरी 2024 को “अस्थायी गौवंश आश्रय स्थल मोतीपुर” का भव्य उद्घाटन पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी द्वारा किया गया। उद्घाटन के अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन भी हुआ, जिसमें क्षेत्र के सैकड़ों लोगों ने भाग लिया।
गौशाला की सबसे खास बात है यहां का अपनापन। कुलदीप सिंह ने गौशाला में रहने वाले प्रत्येक गौवंश का नाम रखा है। वे रोजाना गौशाला पहुंचते हैं, अपने हाथों से चारा खिलाते हैं, उन्हें सहलाते हैं और नाम लेकर पुकारते हैं। आश्चर्य तब होता है जब जिस पशु का नाम लेकर वे आवाज देते हैं, वही पशु दौड़कर उनके पास चला आता है। यह दृश्य देखने वालों के लिए भावुक कर देने वाला होता है।
करीब दो एकड़ भूमि पर हरे चारे की व्यवस्था की गई है, जिससे गौवंश को पर्याप्त पोषण मिल सके। कुलदीप का कहना है कि गौसेवा उनके लिए राजनीति या दिखावा नहीं, बल्कि आत्मिक संतोष का माध्यम है। वे मानते हैं कि यदि इंसान प्रेम और अपनापन दे, तो पशु भी उसे समझते हैं और उसी भाव से प्रतिक्रिया देते हैं। वहीं कुलदीप ने अपनी गौशाला की सुरक्षा हेतु संपूर्ण गौशाला को सीसीटीवी की निगरानी में रखा है जिससे वहां पर होने वाली क्रियाओं को देख सकें।
जैविक खाद के लिए उपलब्ध कराते है गोबर
प्रधान प्रतिनिधि कुलदीप सिंह उर्फ केडी ने बताया कि वह इस गौशाला में एकत्र होने वाले गोबर को समूह की महिलाओं को उपलब्ध कराते है जिससे महिलाएं जैविक खाद को बनाती है और उसे खेतों में उपयोग हेतु किसानों को बिक्री करती है जिससे महिलाओं के रोजगार का साधन भी इसी गौशाला के माध्यम से मिलता है।
आज मोतीपुर की यह गौशाला केवल पशुओं का आश्रय स्थल नहीं, बल्कि संवेदनशीलता, सेवा और समर्पण की पहचान बन चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि कुलदीप सिंह ने साबित कर दिया है कि सच्चा नेतृत्व वही है, जो समाज की समस्या को अपना समझकर उसका समाधान करे। समूह की महिलाओं का कहना है कि मोतीपुर गौशाला की यह पहल न केवल क्षेत्र बल्कि पूरे जनपद के लिए प्रेरणा बनती जा रही है।
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