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निघासन-सिंगाही सड़क हादसा:- बहन की शादी के सपने, मां की उम्मीदें और बच्चों की हंसी सब एक पल में बिखर गए।।

By: दीप मिश्रा संपादक

On: Sunday, February 22, 2026 7:37 AM

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रिपोर्ट:- शरद मिश्रा
लखीमपुर खीरी। बीते शुक्रवार की रात निघासन-सिंगाही मार्ग पर हुई भीषण दुर्घटना ने तीन घरों के चिराग बुझा दिए। शनिवार को जब पोस्टमार्टम के बाद युवकों के शव गांव पहुंचे तो चीख-पुकार से माहौल गूंज उठा। बरोठा और सिंगाही कस्बे में हर आंख नम थी, हर चेहरा शोक में डूबा नजर आया।
हादसा निघासन कोतवाली क्षेत्र में मोटे बाबा के पास हुआ। सेमल की लकड़ियां लादे ट्रैक्टर-ट्रॉली से पीछे चल रही दो बाइकों की टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि तीन युवकों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। मृतकों में बरोठा गांव का 23 वर्षीय विकास, सिंगाही के वार्ड नंबर चार का महेश उर्फ छोटू उम्र 22 और 33 वर्षीय सुरेश कुमार शामिल हैं।

यदि में नौकरी दिलाने की स्थिति में होता तो सबसे पहले अपने परिजनों को लाभ देता:- देवेंद्र कुमार पाण्डेय

जिम्मेदारियों के बीच बुझी जिंदगी

सुरेश कुमार परिवार के सबसे बड़े बेटे थे। वृद्ध मां, पत्नी और दो नन्हे बच्चों की परवरिश का भार उनके कंधों पर था। छोटी बहन की शादी की तैयारी भी वही कर रहे थे। परिवार की तीन बीघा जमीन से गुजर-बसर संभव नहीं थी, इसलिए मजदूरी कर घर चलाते थे। हादसे की खबर मिलते ही घर में मातम छा गया। मासूम बेटे बार-बार पिता को आवाज देते रहे, पर अब वह आवाज कभी लौटकर नहीं आएगी।

तीन घरों में एक साथ टूटा कहर

विकास और महेश भी अपने-अपने परिवार की उम्मीद थे। अचानक आई इस त्रासदी ने तीनों परिवारों को गहरे आर्थिक और भावनात्मक संकट में डाल दिया है। जिन हाथों से घर की रोजी-रोटी चलती थी, वे अब सदा के लिए थम गए।
शनिवार को अंतिम संस्कार के समय गांव की गलियां सिसकियों से भर उठीं। हर किसी के मन में एक ही सवाल था—आखिर इतनी कम उम्र में इन जिंदगियों का अंत क्यों? निघासन और सिंगाही में दिनभर शोक की लहर रही। ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिवारों की आर्थिक सहायता की मांग की है, ताकि इन टूटे हुए घरों को सहारा मिल सके।

दहशत का पर्याय बना तेंदुआ आखिरकार वनविभाग द्वारा लगाए गए पिंजरे में हुआ कैद।।

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