रिपोर्ट:- दीप शंकर मिश्र “दीप”
लखनऊ। यूपी कैडर के वर्ष 2000 बैच के तेजतर्रार एवं अत्यंत कर्तव्यनिष्ठ वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सौरभ बाबू यूपी के वरिष्ठ, अनुभवी और भरोसेमंद प्रशासकों में गिने जाते हैं। अपनी शांत कार्यशैली, व्यावसायिक दक्षता और निष्कलंक छवि के कारण उन्होंने शासन-प्रशासन में अलग पहचान बनाई है।
मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बी.ई. की शैक्षणिक योग्यता रखने वाले सौरभ बाबू तकनीकी सोच के साथ प्रशासनिक निर्णय लेते हैं, जिससे योजनाओं का क्रियान्वयन प्रभावी और समयबद्ध होता है। वर्तमान में वरिष्ठ आईएएस सौरभ बाबू प्रमुख सचिव, सहकारिता विभाग के पद पर कार्यरत हैं, साथ ही ग्राम्य विकास एवं ग्रामीण अभियंत्रण विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे हैं। अपने प्रशासनिक करियर में उन्होंने खाद्य एवं रसद विभाग के आयुक्त, चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव जैसे महत्वपूर्ण दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया है। इसके अलावा, केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के दौरान वे परमाणु ऊर्जा विभाग में निदेशक के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं, जहाँ उनके कार्यों की सराहना हुई।
जिला प्रशासन के स्तर पर सौरभ बाबू जालौन और बहराइच जैसे जिलों के डीएम रह चुके हैं। इन जिलों में उनके कार्यकाल के दौरान कानून-व्यवस्था, विकास कार्यों और जनसुनवाई व्यवस्था को मजबूती मिली। उन्होंने लद्दाख जैसे दुर्गम क्षेत्र में भी प्रशासनिक सेवाएं दी हैं तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के विशेष सचिव के रूप में शासन स्तर पर नीतिगत कार्यों में अहम भूमिका निभाई है। आईएएस सौरभ बाबू की पहचान एक ऐसे अधिकारी के रूप में है जो अनुशासन, पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ कार्य करते हैं। जनसमस्याओं के प्रति उनकी तत्परता और निष्पक्ष निर्णय लेने की क्षमता उन्हें जनप्रिय और भरोसेमंद प्रशासक बनाती है। कुल मिलाकर, सौरभ बाबू यूपी प्रशासन में सुशासन, ईमानदारी और प्रभावी कार्यसंस्कृति के प्रतीक हैं, जिनका योगदान यूपी के विकास और बेहतर प्रशासन की दिशा में निरंतर उल्लेखनीय रहा है।
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नीतिगत निर्णयों से जमीनी बदलाव तक, प्रशासन का भरोसेमंद चेहरा हैं प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास सौरभ बाबू !!























