लखनऊ। यूपी में बसंतकालीन गन्ना बुवाई को लेकर उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। 14.48 लाख हेक्टेयर लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 8.71 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में लगभग 60 प्रतिशत बुवाई सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 7.50 लाख हेक्टेयर से अधिक है। पहली बार गन्ना बीज प्रबंधन को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के लिए 6.90 करोड़ कुन्तल शुद्ध बीज ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किसानों को उपलब्ध कराया गया है। एसएमएस सेवा और एसजीके पोर्टल के जरिए किसानों को नजदीकी बीज उपलब्धता की जानकारी दी जा रही है, जिससे घर बैठे ही बीज प्राप्त करना आसान हो गया है।
प्रदेश के किसानों को उन्नत और अधिक उत्पादन देने वाली गन्ना किस्में उपलब्ध कराने के लिए कई नई प्रजातियां जारी की गई हैं। बीज की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए बड़े स्तर पर सत्यापन अभियान चलाकर 30,067 हेक्टेयर अपमिश्रित तथा 17,126 हेक्टेयर अस्वीकृत किस्मों की पहचान की गई है। बीज वितरण में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए “सीड ट्रैक एंड ट्रेस” ऐप विकसित किया जा रहा है, जबकि सैटेलाइट तकनीक से गन्ना क्षेत्रफल और फसल की स्थिति का आकलन भी किया जा रहा है।
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महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देते हुए 3,184 स्वयं सहायता समूहों की करीब 60 हजार महिलाएं गन्ना नर्सरी तैयार कर रही हैं। किसानों को बीज, उर्वरक, कीटनाशक और अन्य कृषि निवेश उपलब्ध कराने के लिए 94 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है तथा कृषि ड्रोन से दवा छिड़काव को बढ़ावा दिया जा रहा है।
प्रदेश में 121 चीनी मिलें संचालित हैं, जिनमें एथनॉल और बिजली उत्पादन की आधुनिक इकाइयां भी लगी हैं। वर्तमान पेराई सत्र में 858 लाख कुन्तल गन्ने की पेराई कर 87.56 लाख टन चीनी उत्पादन किया गया है। सरकार ने अपने कार्यकाल में 3.19 लाख करोड़ रुपये से अधिक गन्ना मूल्य भुगतान सुनिश्चित कर किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है।
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