कोडईकनाल बुश फ्रॉग। हम सभी जानते है कि मेंढक पर्यावरण स्वास्थ्य के एक सूचक होते है यानी जहां मेंढक सुरक्षित है वहां का पर्यावरण संतुलित और स्वच्छ रहता है।

मगर क्या हम यह जानते है कि मेंढक में भी कई प्रजातियां होती है और उनमें कई प्रजातियां विलुप्त हो चुकी थी मगर समय के साथ वो विलुप्त प्रजातियां पुनः दिखना शुरू हो गई है। ऐसी मेंढक प्रजातियों को जीवित मृत घोषित की श्रेणी में डाला गया मतलब को कभी विलुप्त मानी गई थी लेकिन बाद में जीवित पाई गई।
इन्हीं प्रजातियों एक प्रजाति है कोडईकनाल बुश फ्रॉग इन्हें 1950 के दशक में खोजा गया था लेकिन बाद में लगभग 50 वर्षों तक लुप्त मानी जाती रही। मगर 2004 के फिर से इन्हें कोडईकनाल के जंगलों में देखा गया जिससे इस प्रजाति को जीवित मृत घोषित कर दिया। ये मेंढक ज्यादातर झंडियों, पेड़ों की संख्याओं और पत्तियों पर देखे जाते है और जब मानसून शुरू होता है तो इनकी संख्या अधिक देखी जाती है।

यह मेंढक आकार में छोटा और भूरा या हल्का धूसर रंग के होते है और शरीर पर धब्बे होते है। इनकी आवाज सामान्य मेंढकों से मिलती झूलती होती है मगर आवाज काफी तेज होती है। या प्रजाति भारत के तमिलनाडु राज्य में स्थित पश्चिमी घाट की पर्वतीय श्रेणी क्षेत्र में पाई जाती है। इस प्रजाति के मेंढक को अत्यंत संकटग्रस्त घोषित किया गया है। इस प्रजाति के मेंढक जैव विविधता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इनका संरक्षण पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता के लिए जरूरी है।
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