लखीमपुर लखनऊ अलीगढ वाराणसी आगरा आजमगढ़ इटावा एटा उन्नाव कनौज कानपूर कासगंज गोरखपुर गाजीपुर कुशीनगर कौशांबी गाज़ियाबाद गौतमबुद्ध नगर चंदौली चित्रकूट जालौन जौनपुर झाँसी देवरिया पीलीभीत प्रतापगढ़ प्रयागराज फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूँ बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बाँदा बारांबकी बिजनौर बुलंदशहर भदोही मऊ मथुरा महाराजगंज महोबा मिर्ज़ापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली ललितपुर शाहजहांपुर श्रावस्ती संत कबीर नगर संत रविदास नगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस अन्य
Latest news

विज्ञापन

एक साथ दर्जनों गिद्धों की मौत से हड़कंप, पर्यावरण के लिए बुरा संकेत।।

By: दीप मिश्रा संपादक

On: Tuesday, April 7, 2026 8:52 PM

Google News
Follow Us

रिपोर्ट:- शरद मिश्रा
लखीमपुर खीरी। जनपद के बिजुआ क्षेत्र में एक साथ दर्जनों गिद्धों की मौत से इलाके में हड़कंप मच गया है। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग में भी अफरा-तफरी का माहौल बन गया और टीम तत्काल मौके पर पहुंची।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, गिद्धों ने किसी मृत कुत्ते के शव को खाया था, जिसके बाद एक-एक कर उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद जहरीले पदार्थ के उपयोग की आशंका जताई जा रही है। आशंका है कि किसी ने जानवर के शव में जहर मिलाया हो, जिससे यह गंभीर स्थिति उत्पन्न हुई।
सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर सभी मृत गिद्धों के शवों को कब्जे में ले लिया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का पता चल सकेगा।
इस घटना ने वन्यजीव संरक्षण को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों में भी इस घटना को लेकर चिंता और चर्चा का माहौल है।
वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत विभाग को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके। हम सभी जानते है कि गिद्धों को पर्यावरण का सफाईकर्मी भी कहा जाता है। जब बस्ती में कोई जानवर मरता है तो पक्षी गिद्धराज उसे खा लेते थे जिससे पर्यावरण स्वच्छ रहता था मगर धीरे धीरे जानवरों में दवाओं का दुष्प्रभाव बढ़ता गया और जब जानवर मरता तो पक्षी गिद्धराज खा लेते जिससे उनमें भी दवा का दुष्प्रभाव पड़ता और वह धीरे धीरे विलुप्त होने लगे और आज आलम यह है कि पक्षी गिद्धराज विलुप्तता की कगार पर है और ऐसे में एक दर्जनों गिद्धों का एक साथ मरना वाकई पर्यावरण के लिए बुरा संकेत है।

संघर्ष की मिसाल, किसान का बेटा पहुंचा सचिवालय बना समीक्षा अधिकारी।।

विज्ञापन

For Feedback - pratibhatimes1@gmail.com

Join WhatsApp

Join Now

Join you tube

Subscribe

Leave a Comment