लखीमपुर लखनऊ अलीगढ वाराणसी आगरा आजमगढ़ इटावा एटा उन्नाव कनौज कानपूर कासगंज गोरखपुर गाजीपुर कुशीनगर कौशांबी गाज़ियाबाद गौतमबुद्ध नगर चंदौली चित्रकूट जालौन जौनपुर झाँसी देवरिया पीलीभीत प्रतापगढ़ प्रयागराज फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूँ बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बाँदा बारांबकी बिजनौर बुलंदशहर भदोही मऊ मथुरा महाराजगंज महोबा मिर्ज़ापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली ललितपुर शाहजहांपुर श्रावस्ती संत कबीर नगर संत रविदास नगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस अन्य
Latest news

विज्ञापन

आखिर कहां पाई जाती है सबसे छोटी नस्ल वाली गाय? इन गायों की कदकाठी छोटी मगर दुग्ध उत्पादन ज्यादा।

By: दीप मिश्रा संपादक

On: Thursday, January 29, 2026 4:07 PM

Google News
Follow Us

पुंगनूर गाय: भारत की एक दुर्लभ देशी नस्ल है, जो अपने छोटे कद, उच्च गुणवत्ता वाले दूध और कम देखभाल की जरूरतों के लिए जानी जाती है। यह गाय आंध्र प्रदेश के चित्तूर ज़िले के पुंगनूर क्षेत्र से उत्पन्न हुई है। इस गाय की ऊँचाई लगभग 70 से 90 सेंटीमीटर होती है और यह 115 से 200 किलो वजन की होती है। बात करें यदि इसके दूध उत्पादन की तो यह गाय प्रतिदिन डेढ़ से तीन लीटर दूध देती है। इस गाय के पालने से चारे की खपत बहुत कम होती है।

अब सिर्फ 25 हजार में घर लाए Hero की Bike, जल्द करें बुकिंग कहीं देर न हो जाए।।

पुंगनूर गाय कम पानी, कम चारे और कम जगह में आसानी से पाली जा सकती है। यह इसे ग्रामीण और सूखा-प्रभावित क्षेत्रों में किसानों के लिए एक व्यवहारिक विकल्प बनाती है। इस गाय का दूध पोषण से भरपूर होता है। इसके दूध में उच्च फैट कंटेंट, बीटा-कैसिइन A2 प्रोटीन, एंटी-ऑक्सीडेंट्स और इम्युनिटी बढ़ाने वाले तत्व पाए जाते हैं, जो इसे स्वस्थ जीवनशैली के लिए उपयुक्त बनाते हैं। आज के युग में पुंगनूर नस्ल विलुप्ति की कगार पर है। इसके पीछे कारण हैं विदेशी नस्लों की ओर बढ़ता झुकाव, व्यावसायिक डेयरी मॉडल व नस्ल सुधार पर कम ध्यान। हालांकि सरकार और पशुपालन विभाग अब इसके संरक्षण के लिए योजनाएं बना रहे हैं। बात करें यदि इस गाय के पहचान की तो इसका शरीर छोटा, मजबूत और संतुलित, पूंछ छोटी, सिर छोटा और आंखें चमकदार, रंग सामान्यत सफेद, हल्का भूरा या मिश्रित होता है। पुंगनूर गाय, आकार में भले ही छोटी हो, लेकिन इसकी उपयोगिता और महत्व बहुत बड़ा है। यह नस्ल भारतीय पशुपालन की सतत, देसी और पोषक परंपरा को आगे बढ़ाने में सहायक हो सकती है।

VIVO का यह फोन कम बजट में देगा DSLR जैसा कैमरा, धांसू व प्रीमियम लुक के साथ मार्केट में मचा रहा धमाल।।

विज्ञापन

For Feedback - pratibhatimes1@gmail.com

Join WhatsApp

Join Now

Join you tube

Subscribe

Related News

January 29, 2026

January 29, 2026

January 29, 2026

January 28, 2026

January 28, 2026

January 27, 2026

Leave a Comment