रिपोर्ट:- शरद मिश्रा “शरद”
लखीमपुर खीरी। यूपी का सबसे बड़ा जनपद लखीमपुर खीरी लगभग पूरी तरफ से गन्ने की खेती पर आश्रित है। यहां के किसान फसलों में सबसे पहले गन्ने की खेती को ही वरीयता देते रहे है। जिसके चलते लखीमपुर खीरी को “चीनी का कटोरा” भी कहा जाता है।
बीते कुछ सालों से गन्ना भुगतान को लेकर किसान परेशान हुआ और वह अन्य फसलों में जोर आजमाइश करने लगा, जिसमें सबसे ज्यादा केले की फसल को उगाना शुरू किया। केले की फसल ने शुरुआती सालों में किसानों को बहुत अच्छा मुनाफा दिया। जिसके चलते ज्यादातर किसानों ने गन्ने की फसल को छोड़कर केले को ही प्राथमिकता दी मगर अब किसानों के लिए केले की फसल भी सिर दर्द हो गई है। दरअसल जिस भाव को देखते हुए किसानों ने केले की फसल को लगाया था वह इस वर्ष इतना गिर गया कि किसानों के माथे पर चिंता की सिमटन साफ तौर पर देखी जा सकती है।
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तहसील निघासन क्षेत्र के ओरीपुरवा गांव निवासी किसान गोवर्धन वर्मा के पास लगभग दस एकड़ जमीन है। जिसमें 9 एकड़ में केले की फसल व एक एकड़ में धान की फसल लगाई थी। मिली जानकारी के अनुसार बीते वर्ष केले की फसल का रेट लगभग दो हजार रुपए प्रति कुंतल के आसपास रहा था मगर इस वर्ष केले का रेट गिरकर सात सौ के आसपास रह गया। जिसके चलते किसान गोवर्धन वर्मा ने अपने गांव के समीप लगी तीन एकड़ केले की फसल को जोत दिया। उन्होंने बताया कि केले की फसल का वाजिब दाम न मिल पाने के कारण उन्होंने यह कदम उठाया।
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