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सावन का माह और सरयू की पुकार “मेरे अस्तित्व को मिटने से बचा लो”, क्या कोई मेरी पुकार सुनेगा?

By: दीप मिश्रा संपादक

On: Sunday, August 2, 2026 8:04 AM

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रिपोर्ट: शरद मिश्रा
लखीमपुर खीरी। “मैं वही सरयू नदी हूं, जिसने सदियों तक तुम्हारी प्यास बुझाई, खेतों को हरियाली दी, तुम्हारी आस्था को सहारा दिया और तुम्हारे जीवन को संवारने का काम किया। लेकिन आज मैं खुद अपने अस्तित्व की भीख मांग रही हूं। क्या कोई मेरी पुकार सुनेगा?”
यदि सरयू नदी बोल सकती, तो शायद उसके शब्द कुछ ऐसे ही होते। कभी कल-कल बहने वाली यह नदी आज निघासन क्षेत्र में अपनी पहचान बचाने के लिए संघर्ष कर रही है। वर्षों से हो रहे अतिक्रमण, अवैध कब्जों और लगातार उपेक्षा ने उसकी धारा को इतना संकुचित कर दिया है कि कई स्थानों पर वह नदी कम और नाले जैसी अधिक दिखाई देती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि एक समय था जब सरयू का निर्मल जल इस क्षेत्र की पहचान हुआ करता था। लोग यहां स्नान करने आते थे, धार्मिक आस्था से इसका पूजन करते थे और किसान इसकी जलधारा से अपने खेतों को सींचकर समृद्ध फसल उगाते थे। गांवों की जीवनरेखा कही जाने वाली यही नदी आज खुद जीवन के लिए संघर्ष कर रही है।
आरोप है कि वर्षों के दौरान भू-माफियाओं ने राजनीतिक संरक्षण के दम पर नदी की जमीन पर कब्जे किए। धीरे-धीरे नदी का प्राकृतिक स्वरूप सिकुड़ता चला गया। प्रशासनिक स्तर पर समय-समय पर कार्रवाई की बातें जरूर हुईं, लेकिन धरातल पर हालात में अपेक्षित सुधार नहीं दिखा।

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सरयू मानो समाज से सवाल कर रही हो—”जब मैं तुम्हारे काम आई, तब तुमने मुझे जीवनदायिनी कहा। आज जब मुझे तुम्हारी जरूरत है, तो तुम सब खामोश क्यों हो?”
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नदियों के प्राकृतिक प्रवाह और उनके तटीय क्षेत्र को सुरक्षित नहीं रखा गया, तो आने वाले वर्षों में जल संकट और पर्यावरणीय असंतुलन और गंभीर हो सकता है। सरयू जैसी नदियों का संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है।
आज जरूरत इस बात की है कि नदी से अतिक्रमण हटाया जाए, उसके मूल स्वरूप को पुनर्जीवित करने के लिए ठोस अभियान चलाया जाए और जनभागीदारी के माध्यम से इस प्राकृतिक धरोहर को बचाया जाए। सरयू की मौन पुकार आज भी गूंज रही है, “मुझे मिटने मत दो… मैं सिर्फ एक नदी नहीं, तुम्हारी संस्कृति, आस्था और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य हूं।”
जानकारी के लिए बता दें कि सावन का माह चल रहा है और निघासन क्षेत्र के अधिकांश शिव भक्त इसी सरयू नदी का जल भरकर विभिन्न शिवालयों में जलाभिषेक के लिए जाते है और ऐसे में सरयू में व्याप्त गंदगी से कहीं न कहीं शिव भक्तों को भी परेशानी होगी।

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