पुंगनूर गाय: भारत की एक दुर्लभ देशी नस्ल है, जो अपने छोटे कद, उच्च गुणवत्ता वाले दूध और कम देखभाल की जरूरतों के लिए जानी जाती है। यह गाय आंध्र प्रदेश के चित्तूर ज़िले के पुंगनूर क्षेत्र से उत्पन्न हुई है। इस गाय की ऊँचाई लगभग 70 से 90 सेंटीमीटर होती है और यह 115 से 200 किलो वजन की होती है। बात करें यदि इसके दूध उत्पादन की तो यह गाय प्रतिदिन डेढ़ से तीन लीटर दूध देती है। इस गाय के पालने से चारे की खपत बहुत कम होती है।
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पुंगनूर गाय कम पानी, कम चारे और कम जगह में आसानी से पाली जा सकती है। यह इसे ग्रामीण और सूखा-प्रभावित क्षेत्रों में किसानों के लिए एक व्यवहारिक विकल्प बनाती है। इस गाय का दूध पोषण से भरपूर होता है। इसके दूध में उच्च फैट कंटेंट, बीटा-कैसिइन A2 प्रोटीन, एंटी-ऑक्सीडेंट्स और इम्युनिटी बढ़ाने वाले तत्व पाए जाते हैं, जो इसे स्वस्थ जीवनशैली के लिए उपयुक्त बनाते हैं। आज के युग में पुंगनूर नस्ल विलुप्ति की कगार पर है। इसके पीछे कारण हैं विदेशी नस्लों की ओर बढ़ता झुकाव, व्यावसायिक डेयरी मॉडल व नस्ल सुधार पर कम ध्यान। हालांकि सरकार और पशुपालन विभाग अब इसके संरक्षण के लिए योजनाएं बना रहे हैं। बात करें यदि इस गाय के पहचान की तो इसका शरीर छोटा, मजबूत और संतुलित, पूंछ छोटी, सिर छोटा और आंखें चमकदार, रंग सामान्यत सफेद, हल्का भूरा या मिश्रित होता है। पुंगनूर गाय, आकार में भले ही छोटी हो, लेकिन इसकी उपयोगिता और महत्व बहुत बड़ा है। यह नस्ल भारतीय पशुपालन की सतत, देसी और पोषक परंपरा को आगे बढ़ाने में सहायक हो सकती है।






















